रामलीला मंचन के तीसरे दिन पहुंचे मुख्य अतिथि राज्य मंत्री खेम सिंह चौहान, 'लक्ष्मण-परशुराम संवाद का भव्य मंचन रहा मुख्य आकर्षण'

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 ज्योति डोभाल संपादक 


नई टिहरी : नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में , नवयुवक अभिनय श्री रामकृष्ण लीला समिति 1952,टिहरी" के तत्वाधान मे पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला का आधुनिक एवं हाईटेक तकनीक के साथ हो रहे भव्य आयोजन के तीसरे दिन रामकृष्ण लीला समिति के कलाकारो द्वारा लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने सभी दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया..

इससे पूर्व रामलीला मंचन के तीसरे दिन के मुख्य अतिथि के रूप मे  खेम सिंह चौहान  राज्य मंत्री अन्य पिछड़ा आयोग परिषद उत्तराखंड एवं उनकी धर्म पत्नि रही। 

राज्यमंत्री खेम सिंह चौहान  ने कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा रामलीला जैसे धार्मिक कार्यक्रम होते रहने चहिये, साथ ही हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया और जनता से भी रामलीला मे सहयोग करने की अपील की।


कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि के रूप मे  जयवीर सिंह रावत  अध्यक्ष बार एसोसिएशन टिहरी,  सबल सिंह चौहान  संयोजक निरंकारी मिशन,  प्रभा रतूड़ी तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित,  देवेंद्र चम्याल चार्टर्ड अकाउंटेंट,  राजीव नेगी,  अशोक सैनी अधिशासी अभियंता पीएमजी-1,  शशांक चतुर्वेदी SOS संस्था,  अनूप सेमवाल शिक्षक,  सुनील बडोनी खाद्य विभाग,  जीतराम भट्ट वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए। सभी अतिथिगणो को आयोजन समिती द्वारा पटका तथा स्मृती चिन्ह्  देकर  सम्मानित किया गया !


रामलीला के तीसरे दिन *“धनुश-खण्डन की भव्य प्रस्तुति रही..*

साथ ही लक्ष्मण-परशुराम संवाद के भव्य मंचन ने सभी दर्शकों को आकर्षित किया !


नवयुवक अभिनय श्री रामकृष्ण लीला समिति 1952,टिहरी के अध्यक्ष देवेंन्द्र नौडियाल  ने जानकारी दी कि समिति द्वारा  विशिष्ट अतिथि के रूप में SOS संस्था में रहने वाले उन 40 मासूम बच्चों को भी आमंत्रित किया गया जिनके जीवन से नियति ने वह साया छीन लिया जिसके खो जाने की कल्पना मात्र से रूह काँप उठती है। तीसरे दिन की रामलीला केवल एक मंचन नहीं थी,बल्कि संवेदनाओं, अपनत्व और मानवता का एक भावपूर्ण संगम बन गई।

वे बच्चे जिन्होंने अपनों को खो दिया, वे नन्हे चेहरे जिनके सिर से संरक्षण, प्यार और सहारे का हाथ उठ गया, लेकिन आज रामलीला मंच ने उन्हें यह एहसास दिलाने का छोटा सा प्रयास किया कि  वे अकेले नहीं हैं, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। 

उन मासूम मुस्कानों में दर्द भी था,संघर्ष भी था,लेकिन साथ ही उम्मीद की एक चमक भी थी।

 यह संध्या केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही,बल्कि करुणा, प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक जीवंत संदेश बन गई।


इस अवसर पर समिती के अध्यक्ष देवेंन्द्र नौडियाल के साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगवान चन्द रमोला, मनोज राय व जशोदा नेगी उपाध्यक्ष, अमित पंत महासचिव , अनुराग पंत निर्देशक , गंगा भगत नेगी व नन्दू बल्मिकी सचिव , वेशभूषण जोशी , कमल महर ,राकेश भूषण गोदियाल, राजेन्द्र असवाल , महीपाल नेगी , चंडी प्रसाद  ड़बराल , शिष्टानन्द पांडेय आदि सरंक्षक, एवं अनुसुया नौटियाल, मनोज शाह , अनुज पंत , चरण सिंह नेगी अनुराग पंत , राजीव रावत , तपेन्द्र चौहान, गोविन्द पुंडिर , हरीश घिल्डियाल, राकेश मोहन भट्ट , मनीष पंत , शंकर सैनी आदि उपस्थित रहे !

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