"इन्ताजामिया कमेटी जामा मस्जिद-नई टिहरी" के पूर्व सदर मुशर्रफ अली की मुहिम "एक फल-दो रोटी" जिसमे मुस्लिम समुदाय और मुस्लिम संघटनो से आहवान किया गया की प्रत्येक दिन गौवंश को अपने हाथो कोई भी एक फल और दो रोटी खिलायें, अगर ऐसा सम्भव नही तो कम से कम अपने घरों में इस्तेमाल होने वाली सब्जी और फलों के Vastage और छिलके आदि (जो गीले न हो) ही गौवंश को अपने हाथों से खिला दें... मुशर्रफ भाई की इस मुहिम का असर पहाड़ी क्षेत्र मे काफी दिखायी दे रहा है, मुस्लिम समुदाय और कई मुस्लिम संघटनो, जैसे मुस्लिम सेवा समीति-उत्तरकाशी, डा0 APJ अब्दुल कलाम आजाद विचार मंच-टिहरी, कौमी एकता एवं सौहार्द समीति-पौड़ी आदि ने इस मुहिम का स्वागत किया और ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को जोडने का आश्वासन दिया ! और इस दौरान हमने पाया की लॉकडाउन के समय ज़्यादातर लोग घरों मे ही हैं, जिसके कारण गौवंश को पर्याप्त खादय पदार्थ सामान्य दिनों की अपेक्षा कम उपलब्ध हो पा रहे हैं, और मुशर्रफ भाई की अपील पर जो फलों के Vastage और छिलके आदि व्यर्थ जा रहे थे, वो गौवंश के काम आ रहें हैं, और गौवंश इन्हे बड़े चाव से खा भी रहें हैं !
इन्तजामिया कमेटी जामा मस्जिद टिहरी क पूर्व सदर मुशर्रफ अली की सराहनीय पहल : गौवंश के लिए शुरु की एक फल दो रोटी की मुहिम
मई 23, 2020
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"इन्ताजामिया कमेटी जामा मस्जिद-नई टिहरी" के पूर्व सदर मुशर्रफ अली की मुहिम "एक फल-दो रोटी" जिसमे मुस्लिम समुदाय और मुस्लिम संघटनो से आहवान किया गया की प्रत्येक दिन गौवंश को अपने हाथो कोई भी एक फल और दो रोटी खिलायें, अगर ऐसा सम्भव नही तो कम से कम अपने घरों में इस्तेमाल होने वाली सब्जी और फलों के Vastage और छिलके आदि (जो गीले न हो) ही गौवंश को अपने हाथों से खिला दें... मुशर्रफ भाई की इस मुहिम का असर पहाड़ी क्षेत्र मे काफी दिखायी दे रहा है, मुस्लिम समुदाय और कई मुस्लिम संघटनो, जैसे मुस्लिम सेवा समीति-उत्तरकाशी, डा0 APJ अब्दुल कलाम आजाद विचार मंच-टिहरी, कौमी एकता एवं सौहार्द समीति-पौड़ी आदि ने इस मुहिम का स्वागत किया और ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को जोडने का आश्वासन दिया ! और इस दौरान हमने पाया की लॉकडाउन के समय ज़्यादातर लोग घरों मे ही हैं, जिसके कारण गौवंश को पर्याप्त खादय पदार्थ सामान्य दिनों की अपेक्षा कम उपलब्ध हो पा रहे हैं, और मुशर्रफ भाई की अपील पर जो फलों के Vastage और छिलके आदि व्यर्थ जा रहे थे, वो गौवंश के काम आ रहें हैं, और गौवंश इन्हे बड़े चाव से खा भी रहें हैं !
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