कार्मल स्कूल चम्बा मे सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता शिविर का आयोजन

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 ज्योति डोभाल संपादक 


टिहरी : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशों के अनुपालन एवं उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के मार्गदर्शन में अध्यक्ष  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/जनपद न्यायाधीश, टिहरी गढ़वाल  नितिन शर्मा  के निर्देशानुसार सचिव  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टिहरी गढ़वाल  दयाराम एवं सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) मिथिलेश पाण्डेय के तत्वावधान में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ (बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012) के अंतर्गत दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को कार्मेल स्कूल चम्बा, टिहरी गढ़वाल में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। उक्त अभियान दिनांक 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन जनपद के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 


कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विशेष रूप से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) तथा बच्चों की सुरक्षा से संबंधित अन्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर सचिव महोदय द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि ‘सुरक्षित बचपन अभिया का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, POCSO अधिनियम के प्रावधानों तथा ऑनलाइन सुरक्षा के संबंध में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की बातों को गंभीरता से सुनें और उन्हें ऐसा सुरक्षित वातावरण प्रदान करें, जिसमें वे बिना किसी भय या संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। बच्चों को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में वे अकेले नहीं हैं और उन्हें समय पर उचित सहायता एवं कानूनी संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है। **प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण प्रदान करना परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) श्री मिथिलेश पाण्डेय द्वारा उपस्थित विद्यार्थियों को पोक्सो अधिनियम पर जानकारी देते हुए अपने सम्बोधन में कहा गया कि  विद्यार्थियों को उनकी आयु एवं समझ के अनुरूप सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने शरीर की सुरक्षा, अनुचित व्यवहार का विरोध करने तथा ऐसी किसी भी घटना की जानकारी अभिभावक, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क को देने के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। बच्चों को समझाया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण या दुर्व्यवहार के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें बिना किसी भय या संकोच के सहायता प्राप्त करनी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों एवं शिक्षकगणों को आपातकालीन सहायता एवं शिकायत दर्ज कराने के लिए *चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए **साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930* तथा निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए *टोल-फ्री विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100* की जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार के बाल शोषण, दुर्व्यवहार अथवा ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में बिना किसी भय या संकोच के उचित माध्यम से सहायता प्राप्त करनी चाहिए। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण प्रदान करना परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी है। 

उक्त जागरूकता शिविर के सफल संचालन में रिटेनर अधिवक्ता  राजपाल सिंह मियां, विद्यालय के फादर  जॉस, विद्यालय के प्रधानचार्य  राजू, विद्यालय के समस्त विद्वान शिक्षकगण एवं प्राधिकरण के पराविधिक स्वयं सेवी  गुड्डी रावत, कविता राणावत,  कृष्णा रौतेला व  अजय नेगी उपस्थित रहे।

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