टिहरी झील के चारो तरफ प्रस्तावित रिंगरोड का ग्रामीणों ने किया विरोध, शासन प्रशासन पर लगाया उपेक्षा का आरोप

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ज्योति डोभाल संपादक 



 टिहरी : टिहरी झील के चारो तरफ प्रस्तावित रिंगरोड का ग्रामीणों ने किया विरोध, शासन प्रशासन पर लगाया उपेक्षा का आरोप,  1200 करोड़ की लागत से बनने वाली राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के निर्माण पर ग्रहण लग सकता है,


-रिंग रोड संघर्ष समिति के द्वारा एक दर्जन से अधिक गाँव के ग्रामीणों व जन प्रतिनिधियों ने रौलाकोट के भामेस्वर महादेव मंदिर मे एक बैठक आहूत की गई,


जिसमे ग्रामीणों ने शासन प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है ग्रामीणों ने कहा कि *रिगरोड चौड़ी कारण के नाम पर शासन प्रशासन ग्रामीणों की बिना अनुमति के ग्रामीणों की जमीनों व मकानों का अधिग्रहण कर रह है,साथ ही सड़क चौड़ी कारण के नाम पर भी जमीनो का मुआवजा में भी ग्रामीणों के साथ सौतेला व्यवहार* किया जा रहा है,


*ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि वह PWD विभाग, जिला प्रशासन, ADB, पर्यटन विभाग के अधिकारियों को आदेश करें कि वह दुबारा से समिति के लोगो के साथ रिंगरोड के मामले में वार्ता करें, जिससे ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो सके,अगर कोई भी सम्बंधित अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नही करते है तो कोई भी ग्रामीण रिंगरोड सड़क चौड़ीकरण के लिए अपनी जमीन नही देगे, *जिससे टिहरी झील के चारो तरफ 1200 करोड़ की लागत से बनने वाली रिंगरोड के निर्माण पर रोक लगेगी,और  इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के निर्माण पर ग्रहण लग सकता है l


ग्रामीणों ने साफ साफ कहा कि अगर जल्दी यह मांग नही मानी जाती है तो ग्रामीण उग्र आन्दोलन करने को मजबूर होंगे,


*ग्रामीणों ने कहा कि

चौंदार-मोटना-नकोट-चांठी-

रौलाकोट-झिवाली-बेरबागी-सेम- घंडियालकी-रौणीया-पथियाणा, कँगसाली-खरोली-नोताड़ के कस्तकारों की मुख्य मांग है कि शासन प्रशासन इन मुख्य बिंद पर  एक आम बैठक करके ग्रामीणों से साथ वार्ता करें,अगर समस्याओं का समाधान नही होता है तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे*,


(1) सड़क के मुआवजा को लेकर दोहरे मानक न अपनाया जाएं सड़को का एन एच के तर्ज पर एक समान भुगतान किया जाय,

 (2) सड़क चौड़ीकरण में शीथीलता अपनाई जाय

(3)कई जगहों पर सड़क एलाइनमेंट चेंज किया जाए,

(4) जिन गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है उन्ही गावो के आसपास डेवलपमेंट किया जाय,न कि ऐसी जगहाँ पर जहाँ एक भी जमीन अधिग्रहण नही हो रही है,


टिहरी झील के किनारे रिंगरोड के निर्माण का विरोध मुख्य रूप से विस्थापितों और स्थानीय लोगों द्वारा किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें अपनी जमीन, रोजी-रोटी और पारंपरिक चरागाहों के छिन जाने का डर है; वहीं सरकार इसे पर्यटन और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ज़रूरी बता रही है, लेकिन विस्थापितों को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास न मिलने की शिकायतें हैं, जिससे भविष्य में भी यह परियोजना विवादित रह सकती है, जैसा कि बांध निर्माण के समय भी हुआ था,


रिंगरोड समिति के अध्यक्ष अरविन्द नौटियाल,उपाध्यक्ष राहुल राणा,विक्रम सिंह,सचिव राजपाल सिंह,सहसचिव धीरेंद्र सिंह,कोषाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह,सरंक्षक सागर भंडारी,ग्रामीण केदार सिंह रावत,बालम सिंह धनाई,उत्तम सिंह शीशपाल,कैलाश,प्रीति,आशीष,भागवान सिंह,आदि, उपस्थित रहे l

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