रिपोर्ट : ज्योति डोभाल
टिहरी : उत्तराखंड में सशक्त भू क़ानून लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को तहसील गजा में प्रगतिशील जन विकास संगठन टिहरी गढ़वाल गजा के अध्यक्ष दिनेश प्रसाद उनियाल के नेतृत्व में सांकेतिक धरना दिया गया तथा तहसीलदार गजा रेनु सैनी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार देहरादून को ज्ञापन भेजा गया । अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रगतिशील जन विकास संगठन गजा व सिविल सोसायटी नकोट के पदाधिकारियों ने 10 बजे सुबह से ही तहसील परिसर गजा में कोविड -19 नियमों का पालन करते हुए सांकेतिक धरना भू कानून लागू करने के लिए दिया । एक दर्जन पदाधिकारियों ने हाथों में भूकानून लागू करने के नारे कागज पर लिखकर धरना स्थल पर बैठे ।नारों में " जन जन की यही पुकार भू क़ानून लागू करें सरकार । उत्तराखंडी जागी जावा एकजुट ह्वे जावा । उत्तराखंड की यही पहचान मांग रहे भू कानून आदि नारे लगाए । दिनेश प्रसाद उनियाल अध्यक्ष प्रगतिशील जन विकास संगठन गजा ने कहा कि भूमि बिक्री पर प्रतिबंध लगाना होगा.
अब तक जो भी सरकारें बनी हैं उनका ध्यान पृथक राज्य की मूल भावना से हट गया । मूल निवास प्रमाण पत्र लागू होना चाहिए था लेकिन मूल निवास को समाप्त कर स्थाई निवास बना दिया जिससे रोजगार का भी नहीं मिल पाया है । विक्रम सिंह रावत व अनिल भंडारी ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की तरह सशक्त भू क़ानून लागू होना चाहिए था । बेहिसाब भूमि खरीदने से यहां की अस्मिता , सामाजिक समरसता भी खतरे में हो रही है । हमारे रीति-रिवाजों व धार्मिक भावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं । रिटायर सूबेदार मनजीत सिंह नेगी ने कहा कि धीरे धीरे दूसरे प्रदेशों के लोगों के सैकड़ो एकड़ जमीन खरीदने पर हम भूमिहीन हो जायेंगे ।
सांकेतिक धरना स्थल पर टंखी सिंह नेगी ने चेताया कि आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी अगर हम अभी सचेत नहीं हुए । सांकेतिक धरने में दिनेश प्रसाद उनियाल , विक्रम सिंह रावत , राजवीर सिंह चौहान , अनिल भंडारी , बासुदेव उनियाल , चतर सिंह नेगी , टंखी सिंह नेगी , मनजीत सिंह नेगी , दिलवीर सिंह रावत , सूर्य रावत , एल एस राणा , सुरजीत सिंह , उपस्थित थे ।





🙏जय देव भूमि उत्तराखंड 🙏 देवभूमि उत्तराखंड की जनता की है यही पुकार भू कानून अति शीघ्र लागू करें उत्तराखंड सरकार यदि उत्तराखंड को बचाना है तो भू कानून अति शीघ्र लागू होना चाहिए अन्यथा इसके परिणाम आने वाले समय में बहुत घातक हो सकते हैं देवभूमि उत्तराखंड एक तपस्थली भूमि है जिस भूमि का चयन देवी देवताओं ने जगत कल्याण कार्य रचनाओं के लिए यहां बैठकर तप किया था जिनकी वजह से यह धरती आज भी प्रसिद्ध है यहां आज भी लाखों करोड़ों व्यक्ति हर साल यहां आकर मनचाहा वरदान आज प्राप्त करता है आज भी देवी-देवताओं के प्रति यहां के लोगों का मान सम्मान बरकरार है लेकिन धीरे-धीरे यहां लोग बाहर से आकर बसने लग गए हैं जिनकी आस्था देवी-देवताओं के प्रति बिल्कुल भी नहीं है जो सिर्फ इस स्थान को मौज मस्ती का स्थान समझ बैठे हैं और यहां आकर अनेकों घिनौने कार्य कर रहे हैं और जिनकी वजह से हमारी सभ्यता और संस्कृति दिन प्रतिदिन लुप्त होती हुई नजर आ रही है और यह देव भूमि में दानव प्रवृत्ति वाले मानसिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती हुई नजर आ रही है जिन स्थानों में भगवान के प्रति आस्था रखने वाले व्यक्ति लाखों करोड़ों की संख्या में जाकर मनचाहा फल प्राप्त करते थे उन्हीं स्थानों में आज लोग मौज-मस्ती करने पहुंच जाते हैं और यह लोगों को भी भ्रमित करने का कार्य करते हैं और यह यहां की भोली भाली जनता को भ्रमित कर नाजायज प्रयोग करते हैं आज यहां अगर बचा हुआ है वह हमारे पूर्वजों के संस्कार हैं हमारे रीति रिवाज है हमारा आपस में प्रेम भाव है आज फिर सत्य के प्रति मान सम्मान बरकरार है लेकिन अगर यही हालात रहे तो बहुत जल्द यह स्वर्ग भूमि नर्क भूमि बनने में देर नहीं होगी जिसके परिणाम विनाशकारी सिद्ध हो सकते हैं यह परम सत्य है और यही ब्रह्म सत्य है आज जिन स्थानों में पूजा पाठ होना था उन्हीं स्थानों में आज मदिरा मांस का सेवन किया जा रहा है जिसके परिणाम आज संपूर्ण विश्व को भुगतना पड़ रहा है आज संपूर्ण विश्व में मनुष्य सिर्फ शारीरिक सुख भोग विलास में इतना अंधा हो गया की उसे सिर्फ शारीरिक सुख के सिवा अतिरिक्त कुछ और नजर नहीं आ रहा आज अगर कुछ प्रतिशत लोग यदि बचे हुए हैं तो सबसे अधिक संख्या वाले व्यक्ति सिर्फ उत्तराखंड में मिल सकते हैं इस भूमि की महिमा अपरंपार है इसे बचाने में अभी भी सक्षम हो जाओ अन्यथा मनुष्य जीवन विनाशकारी सिद्ध होगा जय देव भूमि उत्तराखंड
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