दम तोड़ती भारत सरकार की संचार सेवाएं, कैसे होगा डिजिटल इंडिया का सपना साकार

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Team uklive

रिखणीखाल... भारत सरकार का उपक्रम भारत संचार निगम लिमिटेड की संचार सेवा दम तोडती  आखिरी सांस ले रही है।लोगो के जनजीवन व डिजिटल इण्डिया श्रृंखला पर पलीता लग रहा है. 

रिखणीखाल को कौन नहीं जानता?रिखणीखाल आज कल खासा सुर्खियो में है।आये दिन यहाँ कुछ न कुछ घटनाये घटित होती रहती है जिसे शासन प्रशासन अच्छी तरह जानता है,लेकिन नतमस्तक है।

       आज हम बात करेगे,भारत संचार निगम लिमिटेड के इन खास टावरो की जो रिखणीखाल मुख्यालय क्वीराली तथा कर्तिया में शो पीस की तरह व हमें चिढा रहे है।रिखणीखाल एक 81 ग्राम पंचायतो का मुख्यालय है,जहाँ पर ब्लाक स्तरीय कई  कार्यालय,संस्थान है लेकिन ये नेटवर्क के अभाव मे दम तोड रहे है।संचार नेटवर्किंग ऑख मिचोली का खेल खेलता है।लोग अपने काम से बैरंग लौटकर गाली देते रहते है।

अब क्वीराली का टावर ये भी लोगो के साथ छलावा करने में कम नहीं है।इसका भी कोई साई गुसाई नहीं है।न जाने कब दगा दे जाता है,कुछ पता नहीं लगता।महीने में मुश्किल से दस बारह दिन धीमी गति से हमें परेशान कर रहा है।बिजली कडकी या आंधी  तूफान आया तो ये हमें छोड़कर भाग जाता है।आमतौर पर भारत संचार निगम लिमिटेड के अधिकारियो व कर्मचारियो के मुंह से यह सुना जाता है कि हमारे पास बजट व उपकरण के लिए धन का अभाव है,व हमको कयी महीनो है वेतन भत्ता नही मिला।अब वेतन भत्ता से गाँव के लोगो का क्या मतलब है ये समझ से परे है।इस टावर के अन्तर्गत जो भी गाँव आते है वे पाषाण काल के गाँव है जहाँ भूत पिचास व जंगली जानवर विचरण करते है।जंगली जानवरो का गिरोह सक्रिय रहता है।कब क्या हो जाये पता नही लगता।विकास तो इन गाँवो तक पहुंचता ही नही।इनको पूछो विकास किसे कहते है ये अपने बच्चो का नाम लेने लगते है।कोई भी सूचना  आदान प्रदान नही हो पाती।

अब रही कर्तिया के टावर की कहानी ये अपने आप में निराला है ये सिर्फ खेती की रखवाली जंगली जानवरो से बचाने के लिए मचान व वाच टावर के लिए उपयुक्त है।जो काम इसको भारत संचार निगम लिमिटेड ने दिया है उसे करने को खुश नही है।इसने बेमतलब खेती की जमीन घेर रखी है।

आज क्षेत्र पंचायत सदस्या ग्राम नावेतली  बीना रावत ने इन टावरो पर  मुख्यमंत्री,उत्तराखंड का ध्यान आकर्षित करने को कहा है।उन्होंने कहा ये तीनो टावरो से लोग बहुत दुखी व व्यथित हैं।ये सिर्फ शो पीस की तरह हमारी जगह घेरे हुए है।वे कहते हैं कि इन टावरो को सुव्यवस्थित चलाया जाये वरन इनकी जगह अन्य कंपनियो के टावर स्थापित किये जाये ताकि डिजिटल इण्डिया का सपना साकार हो सके।हम लोगो को भी अपनी बात सरकार तक व अपने सगे सम्बन्धियो तक पहुँचा सके।हमने सोचा भी नही था कि मोदी जी के डिजिटल इण्डिया में ऐसे भी दिन काटने पडेगे।

प्रभुपाल सिंह रावत ग्राम नावेतली,रिखणीखाल साथ रहे.  

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