Team uklive
घनसाली ( बूढ़ाकेदार )... बालगंगा और धर्मगंगा के संगम के साथ बाबा बूढ़ाकेदार का उत्पत्ति स्थान, नब्बे जूळा थातीकठूड़ के आराध्य देव गुरुकैलापीर तथा उसके "चव्वन चेड़ा बावन वीरों" थाती के साथ अखिल ब्रह्माण्ड नायका मां राजराजेश्वरी जो की पूज्य धरती तो है ही बल्कि आदिकाल से ही पूरे क्षेत्र के लिये सांस्कृति तथा सामाजिक कार्यों का उदगम् स्थल भी रहा है ।
इसका ताजा उदाहरण महाशिवरात्री के दिन बूढ़ाकेदार की शस्य श्यामल धरती पर उत्साही युवकों द्वारा आयोजित भोले शंकर कि विभिन्न प्रसंगों की झांकियां प्रस्तुत कर यह तो साबित कर ही दिया कि पूरखों द्वारा स्थापित परंपरा को जीवित रखने में अपनी तरुण बुद्धि के साथ आधुनिक साज सज्जा का तड़का लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।
सुबह से ही बाबा बूढ़ाकेदार के मंदिर में भक्तानुरागियों का जलाभिषेक तांता लगा हुआ था । जबकि आयोजनकर्ता अपने कार्य में जुटे थे ।
अपराह्न करीब 3 बजे वाद्ययंत्रों के साथ जनता का हजूम बालगंगा-धर्मगंगा के तट पर स्थिति हनुमान मंदिर पर एकत्रित हो गया ।
साढे तीन बजे के आसपास शिव, पार्वती, ब्रह्मा, विष्णु, आदि देवताओं की झांकी मंदिर की ओर प्रस्थान करती है । आगे आगे अपनी पारंपरिक भेषभूषा में महिलाएं कलश के साथ एक सुन्दर सजीली पालकी में शिव-पार्वती के भेष में दो सुन्दर कन्याएं मानों शिव- पार्वती बूढ़ाकेदार की धरती पर उतर आये हों ।
अपने मकान की छतों से झांकी को देख रहे लोग पुष्प वर्षा कर रहे थे तो युवक - युवतीयां वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य कर रहे थे तो कुछ उत्साही जन केदार केदार
बूढ़ाकेदार का गगनभेदी उदघोष कर रहे थे ।
साहित्यिक भाषा में कहा जाय तो ऊंची - ऊंची डांडी-कांठिया इस अद्भुत दृश्य को देखकर मानों भक्ति भाव से मुस्कारा रही हो और शिवमयी गगन भेदी उदघोष से मानो भगवान आषुतोश की समाधिस्त तन्द्रा टूटी हो !
गांव के बीचोंबीच से झांकी गुजराती हुई बूढ़ाकेदार मंदिर प्रांगण में पहुंचती है जहां पहले से सैकड़ों शिव भक्त झांकी की प्रतिक्षा में थे ।
तत्पश्चात मंदिर प्रांगण में रात्रि जागरण हिमालय पुत्री साध्वी लक्ष्मी बहिन जी एवं उनकी टीम द्वारा हुआ ।
जागरण के दौरान शिव प्रसंगों की कई प्रकार की झांकिया स्थानीय कलाकारों द्वारा पेश की गयी । जिसमें महाकाल, महाकाली का खप्परधारी नृत्य, शिव विवाह की एकांकी के अलावा बाबा बूढाकेदार नाथ जी की उत्पत्ति की गरिमापूर्ण अद्भुत भाव नाटिका प्रस्तुत की गयी जो आपने आप में अद्वितीय थी । दूर दराज क्षेत्रों से आये भक्तानुरागियों प्रातः 4:00 बजे तक जागरण किया तथा बाबा बूढाकेदार के भजन जयकारा लगते रहे । साध्वी लक्ष्मी जी ने भी अपने कर्णप्रिय भजनों से शिवभक्तों को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया ।
तत्पश्चात हवन, पूर्णआहुति के साथ महाप्रसाद वितरण हुआ । और भक्त जन इसी आशा आशीर्वाद ग्रहण कर अपने गंतव्य को प्रस्थान कर गये कि-
बाबा बूढ़ाकेदार अगले वर्ष इसी मौके पर ऐसी ही व्यवस्था के साथ दर्शन हेतु आयेंगे ! !
तब तक हमारे पूरे क्षेत्र के लोगों को
वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ अपना आशीर्वाद बनाये रखें ऐसी मनोकामना छेत्र ले लोगों द्वारा की गई.


