रिपोर्ट... ज्योति डोभाल
टिहरी.... रॉड्स अध्यक्ष सुशील बहुगुणा ने किसानों को लेकर कहा कि काश ! किसान नेता अपनी ही अगली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में भी जरा सोच लेते रासायनिक खाद व कीटनाशकों के अतिशय इस्तेमाल और अंधाधुंध भूजल दोहन का क्या असर हो रहा है , उस पर किसान आंदोलनकारियों के लिए तो यह विषय ही नहीं । उनके सामने यह भी विषय नहीं कि पंजाब , हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान और गन्ना जैसी अधिक पानी वाली फसलें क्यों उगाई जा रही हैं । इसका कोई मतलब नहीं कि जल संकट सामने देखते हुए भी पानी की अधिकता वाली फसलें उगाई जाएं । किसानों और खासकर पंजाब के किसानों को क्या जैविक खेती की जरूरत को रेखांकित करते हुए आंदोलन नहीं करना चाहिए था ? लेकिन वे नहीं कर रहे हैं । कोई भी विवेकशील व्यक्ति कहेगा कि कीटनाशक की बुराइयों एवं अत्यधिक भूजल दहन के खिलाफ किसानों का आंदोलन होना चाहिए था , न कि बिचौलियों और आढ़तियों के मुनाफे के लिए । मौजूदा कृषि कानून विरोधी आंदोलन वैसे लोगों का अधिक लगता है जिन्हें अपने मुनाफे में कमी आने की आशंका सता रही है । इस आंदोलन को उकसाने और उसे जारी रखकर सरकार को परेशान करने के लिए कैसी कैसी शक्तियां लगी हुई हैं , यह सब अब जगजाहिर हो चुका है । ये शक्तियां क्यों चाहेंगी कि ड्रग्स एवं कीटनाशक का इस्तेमाल कम हो जाए ? ध्यान रहे कि ड्रग्स के बढ़ते चलन के कारण सेना में भर्ती के लिए पहले जैसे दमखम वाले जवान पंजाब में नहीं मिल रहे हैं । नेशनल डिफेंस अकादमी के प्रधान ने इस बात पर चिंता भी प्रकट की है । आर्सेनिक युक्त जल और कैंसर जनित अनाज की समस्या देश के अन्य हिस्सों में भी कमोबेश है , पर पंजाब की समस्या गंभीर है । पंजाब सरकार ने जल शोधन संयंत्र जरूर लगाए हैं , परउनसे पूरा पानी साफ नहीं हो पा रहा है । देश के विभिन्न हिस्सों में निजी एवं सरकारी प्रयासों से जैविक खेती का विस्तार किया जा रहा है । क्या पंजाब में भी जरूरत के अनुपात में कभी पर्याप्त खेती की जायेगी.


