08 वर्षो से नहीं बन पाया पुल , प्रसासन बैठा मौन

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रिपोर्ट... वीरेंद्र  नेगी 
उत्तरकाशी.. वर्ष 2012 की बाढ़ के 8 वर्ष बाद भी आज भी अस्सी गंगा घाटी के हालात नहीं सुधरे हैं। आपदा में क्षतिग्रस्त मार्गों और बहे ग्रामीण पुलों का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हर वर्ष ग्रामीणों को स्वयं अपनी आवाजाही के लिए इन ग्रामीण पुलों का निर्माण करना पड़ता है। इसी क्रम में अगोड़ा गांव के ग्रामीणों ने डोडीताल ट्रैक पर बेवरा नामे तोक में अपनी गौशालाओ और खेतों की आवाजाही के लिए अस्थाई पुल का निर्माण श्रमदान से करना पड़ा।


 विश्व प्रसिद्ध डोडीताल ट्रैक पर आपदा के दौरान बेवरा नामे तोक में ग्रामीणों की गौशालाओ और खेतों के जाने के लिए जडिगाड़ का पुल बह गया था। यह पुल डोडीताल पर्यटन दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था। आठ वर्षों से इस पुल का निर्माण नहीं हो पाया था। इसलिए ग्रामीण हर वर्ष यहां पर श्रम दान से अस्थाई पुलिया का निर्माण करते हैं। जो हर वर्ष बरसात में बह जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर कब तक इसी प्रकार अस्थाई पुलों का निर्माण करना पड़ेगा।

 वर्ष 2012 की आपदा के दौरान विश्व प्रसिद्ध डोडीताल और अस्सी गंगा के चार गांव अगोड़ा,भंकोली,ढासड़ा, दंडालका गांव को जोड़ने वाला संगमचट्टी से अगोड़ा तक 5 किमी पैदल ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसका निर्माण आज तक नहीं हो पाया। तो वहीं बरसात में ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर ऊपर से पत्थर आने और नीचे खाई में गिरने के भय के बीच जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। तो वहीं ग्रामीण जब इन रास्तों से गुजरता है तो अपने साथ साइनमार्क और निशान लगा जाते हैं। जिससे कि पीछे से आने वाला ग्रामीण जंगल मे रास्ता न भटके।    

                 मुकेश  पवार प्रधान अगोडा 

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