ABVP द्वारा स्कूलों को बनाया जा रहा चुनावी अखाड़ा अनुच्छेद 28-4 का कर रहे खुला उल्लंघन

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विगत कुछ वर्षों से प्रदेशभर के बालक, बालिका  इंटर कालेजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ABVP अपना सदस्यता अभियान चलाता आ रहा है। विद्यालयी शिक्षक,प्रधानाचार्य अज्ञानतावश इन्हें विद्यालयी मंच उपलब्ध करा रहे हैं जो कि सर्वथा अनुचित है।
 इन विद्यालयों में अल्पवयस्क बच्चे पढ़ते हैं संविधान के अनुच्छेद 28 -4 के अनुसार  शिक्षण संस्थाओं में बच्चों के अभिभावक की इच्छा के विरुद्ध अथवा उसकी सहमति के बिना उन्हें कोई भी शिक्षण संस्थान किसी राजनीतिक दल धार्मिक दल अथवा किसी  विचारधारा पर चलने वाले संगठन का सदस्य नहीं बना सकते हैं।
    लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
छात्र संगठनो का कहना है कि आजकल विद्या भारती के विद्यालयों में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र आये थे  विद्यालय द्वारा इन्हें सदस्यता मामले में अपनी असहमति बता दी गयी उसके बाद यह छात्र विनम्रतापूर्वक चले गये। 
    लेकिनABVP काकहना था 
"अन्य विद्यालयों में तो ऐसी कोई आपत्ति नहीं दिखाई गयी हमारा यह कार्य तो वर्षो से चल रहा है।" 



विद्यालय प्रशासन ने कहा यह कोई तर्क नही वर्षों से किया जा रहा कार्य भी गलत हो सकता है।
   विगत वर्ष भी विद्यालय ने इन छात्र नेताओं से कहा था आपका यह कार्य विधिक नहीं है हम अभिभावक या विभाग की अनुमति के बगैर विद्यालय में यह कार्य नही करा सकते। आपके पास कोई विभागीय आदेश हैं तो दिखायें फिर हम कौन होते हैं रोकने वाले। उनके द्वारा बताया गया हमारे पास कोई विभागीय आदेश नहीं है ।
फिर विद्यालय प्रशासन ने कहा आपकी बातों का अनुसरण कर कल अन्य छात्र संगठन भी विद्यालय में आ जायें तो क्या होगा ?
 हमें उन्हें भी अनुमति देनी पढे़गी नही दें तो विवाद होगा, अनुमति दें तो विद्यालय महाविद्यालयों की भांति छात्र राजनीति का अखाडा़ बन जायेगा। आपको सदस्य बनाने हैं तो आप छात्रों के घर जायें।
  जिन स्कूलों में विभागीय आदेश के बिना यह सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है यह सरासर गलत है। यह कार्य संविधान के अनु०28-4 के अनुसार अल्पवस्क बच्चों के मूल अधिकारों के विरुद्द है।
फिर ABVP को यह कार्य कराना ही है तो विभागीय अनुमति से यह कार्य करें अन्यथा छात्र संगठनों के दबाव में यह कार्य करना अनुचित है।
   विद्यालयों के छात्र छात्राएं राजनीतिक विचारों से परे होते हैं उनके अंदर राजनीतिक समझ नहीं होती वह विद्यालय में पूरी तरह शिक्षकों के आदेशों का अनुसरण करते हैं।
 छात्र संगठनो का कहना था कि माध्यमिक शिक्षण संस्थाओं को शांति, व्यवस्था, अनुशासन बेहतर शिक्षण के लिए दलगत छात्र राजनीतिक से परे रखना चाहिए। छात्र, शिक्षक, अभिभावक, प्रधानाचार्य , विभागीय अधिकारी व युवा छात्र संगठनों को भी इसका ध्यान रखना चाहिये ၊
Team uk live
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