टिहरी लोकसभा चुनाव - लोकसभा चुनाव के लिए आज से आचार संहिता लग गई है चुनाव सात चरणो में होने हैं और 23 मई को नतीजे भी आ जायेंगे टिहरी लोकसभा सबसे हॉट सीट मानी जाती है। लेकिन अब तक यहां से जो भी सांसद बना है उसने टिहरी के लिए कुछ भी नही सोचा सोचेगा भी कैसे उनके तो घर या तो देहरादून में है या दिल्ली में तो उसको टिहरी की चिन्ता भला क्यों होगी ၊ भई चिन्ता तो वो व्यक्ति करेगा जो यहां पर रह रहा हो यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को समझता हो ၊ पहले से ही रीत चली आ रही है चाहे वो रजवाड़े खानदान के हों चाहे किसी और खानदान के टिहरी के विकास से इन्हे कोई मतलब नही है इनको तो केवल और केवल अपनी राजनीति चमकानी है वो चमक जाये बस बाकी जायें भाड़ में ၊
टिहरी लोकसभा सीट पर पहले से ही रजवाड़े खानदान का दबदबा रहा है वो बात अलग है कि उन्होने कभी संसद में टिहरी से जुड़ा कोई भी प्रश्न नही पूछा जरूरत भी क्या थी लोग अन्धे भक्तों की तरह वोट दे देते हैं तो प्रश्न क्यों पूछना जीतना तो है ही पर अब परिपाठी बदल रही है ၊
टिहरी लोकसभा से इस बार बीजेपी दोबारा रानी राज्य लक्ष्मी शाह पर दांव खेल सकती है क्योंकि वो सिटिंग सांसद हैं वहीं बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री बिजय बहुगुणा भी अपने बेटे साकेत के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं ၊ खैर टिकट तो बीजेपी से एक ही शख्स को मिलना है देखा जाये तो बिजय बहुगुणा साहब ने टिहरी सांसद रहते हुये चन्द लोगों को ही पनपाने का काम किया बाकी कुछ नही कर सके वहीं टिहरी लोकसभा से वर्तमान सांसद तो अपनी सांसद निधि का पांच साल में एक प्रतिशत भी खर्च नही कर पाई हैं एक सर्वे में सांसद निधि सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में हरिद्वार से सांसद निशंक हैं और सबसे फिसड्डी महारानी राज्य लक्ष्मी शाह ही हैं तो इस लिहाज से बीजेपी इन दोनों पर ही कैसे दांव खेलेगी ये तो बीजेपी जाने पर जनता सब समझती है किसको कब और कहां पटखनी देनी है चलो ये तो थी बीजेपी की बात अब बात कर लेते है कांग्रेस की कांग्रेस भी टिहरी लोकसभा सीट से बतौर उम्मीदवार किशोर उपाध्याय या कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर दांव खेल सकती है इनमे से भी अगर बात की जाये किशोर उपाध्याय की तो उनका गढ़ तो यहीं है जारवणीधार में परन्तु किशोर उपाध्याय भी बीच में बिल्कुल की सक्रिय नही रहे क्षेत्र में अब उनको याद आ रही है टिहरी के लोगों की उनको वनवासी घोषित करवाने की याद अब आ रही है जब उनकी सरकार थी तब नही आई खैर ये तो राजनीति है सब चलता है अब बात कर लेते है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की उनका ग्राफ अगर देखा जाये तो टिहरी को ६ोड़कर चकराता बेल्ट और उत्तरकाशी की कुछ बेल्टों पर उनका अच्छा दबदबा है तो शायद उन्हे कांग्रेस टिहरी लोकसभा से उम्मीदवार घोषित कर दे क्योंकि बीजेपी के पास कोई मजबूत चेहरा इस वक्त नही है अगर बीजेपी महारानी पर दांव लगाती है तो टिहरी सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है पिछली बार मोदी लहर काम कर गई थी तो पांचो सांसद बीजेपी के ही बने परन्तु मोदी कैबिनेट में पांचो में से एक भी सांसद को स्थान न मिलने से लोग नाराज थे वहीं जो लोगों ने सोचा था अब सांसद बीजेपी की , सरकार बीजेपी की है तो विकास होगा पर ऐसा कुछ नही हो सका इसीलिए इस समय मोदी लहर के काम करने के चान्स कम है वहीं बीजेपी कांग्रेस की मुसीबत राष्ट्रीय संत गोपालमणि महाराज के चुनाव मेंउतरने से बढ़ गई है ၊इस समय सांसद उम्मीदवार का चेहरा और उसकी समाज में छवि ही उसे जीत दिलवायेगा बाकी जनता ही जनार्दन है उसके पास सबसे बड़ी ताकत है बोट की ताकत जो सत्ता परिवर्तन करवाती है ၊
संपादक की कलम से
टिहरी लोकसभा सीट पर पहले से ही रजवाड़े खानदान का दबदबा रहा है वो बात अलग है कि उन्होने कभी संसद में टिहरी से जुड़ा कोई भी प्रश्न नही पूछा जरूरत भी क्या थी लोग अन्धे भक्तों की तरह वोट दे देते हैं तो प्रश्न क्यों पूछना जीतना तो है ही पर अब परिपाठी बदल रही है ၊
टिहरी लोकसभा से इस बार बीजेपी दोबारा रानी राज्य लक्ष्मी शाह पर दांव खेल सकती है क्योंकि वो सिटिंग सांसद हैं वहीं बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री बिजय बहुगुणा भी अपने बेटे साकेत के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं ၊ खैर टिकट तो बीजेपी से एक ही शख्स को मिलना है देखा जाये तो बिजय बहुगुणा साहब ने टिहरी सांसद रहते हुये चन्द लोगों को ही पनपाने का काम किया बाकी कुछ नही कर सके वहीं टिहरी लोकसभा से वर्तमान सांसद तो अपनी सांसद निधि का पांच साल में एक प्रतिशत भी खर्च नही कर पाई हैं एक सर्वे में सांसद निधि सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में हरिद्वार से सांसद निशंक हैं और सबसे फिसड्डी महारानी राज्य लक्ष्मी शाह ही हैं तो इस लिहाज से बीजेपी इन दोनों पर ही कैसे दांव खेलेगी ये तो बीजेपी जाने पर जनता सब समझती है किसको कब और कहां पटखनी देनी है चलो ये तो थी बीजेपी की बात अब बात कर लेते है कांग्रेस की कांग्रेस भी टिहरी लोकसभा सीट से बतौर उम्मीदवार किशोर उपाध्याय या कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर दांव खेल सकती है इनमे से भी अगर बात की जाये किशोर उपाध्याय की तो उनका गढ़ तो यहीं है जारवणीधार में परन्तु किशोर उपाध्याय भी बीच में बिल्कुल की सक्रिय नही रहे क्षेत्र में अब उनको याद आ रही है टिहरी के लोगों की उनको वनवासी घोषित करवाने की याद अब आ रही है जब उनकी सरकार थी तब नही आई खैर ये तो राजनीति है सब चलता है अब बात कर लेते है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की उनका ग्राफ अगर देखा जाये तो टिहरी को ६ोड़कर चकराता बेल्ट और उत्तरकाशी की कुछ बेल्टों पर उनका अच्छा दबदबा है तो शायद उन्हे कांग्रेस टिहरी लोकसभा से उम्मीदवार घोषित कर दे क्योंकि बीजेपी के पास कोई मजबूत चेहरा इस वक्त नही है अगर बीजेपी महारानी पर दांव लगाती है तो टिहरी सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है पिछली बार मोदी लहर काम कर गई थी तो पांचो सांसद बीजेपी के ही बने परन्तु मोदी कैबिनेट में पांचो में से एक भी सांसद को स्थान न मिलने से लोग नाराज थे वहीं जो लोगों ने सोचा था अब सांसद बीजेपी की , सरकार बीजेपी की है तो विकास होगा पर ऐसा कुछ नही हो सका इसीलिए इस समय मोदी लहर के काम करने के चान्स कम है वहीं बीजेपी कांग्रेस की मुसीबत राष्ट्रीय संत गोपालमणि महाराज के चुनाव मेंउतरने से बढ़ गई है ၊इस समय सांसद उम्मीदवार का चेहरा और उसकी समाज में छवि ही उसे जीत दिलवायेगा बाकी जनता ही जनार्दन है उसके पास सबसे बड़ी ताकत है बोट की ताकत जो सत्ता परिवर्तन करवाती है ၊
संपादक की कलम से


