अपनी गणना अपने गाँव” अभियान की होगी शुरुआत : जोत सिंह बिष्ट

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ज्योति डोभाल संपादक 


टिहरी : अपनी गणना अपने गाँव अभियान उत्तराखंड के गाँव को बचाने का अभियान है, जिसको आगे बढ़ाना एक नागरिक के रूप में हम सबकी जिम्मेदारी है। उत्तराखंड राज्य के गाँव अलग अलग कारणों से हो रहे पलायन के कारण गाँव कि जनसंख्या में लगातार गिरावट हो रही है। अगर समय पर सचेत नहीं हुए तो जिस भारत को गाँव का देश कहा जाता था उसमें गाँव का अस्तित्व बहुत कमजोर हो जाएगा। इसलिए अपनी गणना अपने गाँव अभियान के माध्यम से हम एक बृहद जनजागरण अभियान चला कर गाँव से शहर की तरफ गए हुए लोगों को फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना के समय गाँव में आकार गणना करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। .....

भारत में जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद इस समय 25 मई तक मकान गणना का काम पूरा होने के बाद फरवरी 2027 में जनगणना का कार्य पूरा किया जाएगा। उत्तराखंड राज्य के निर्माण के बाद राज्य की विधानसभाओं का पहला परिसीमन  1971 की  जनसंख्या पर हुआ था। तब से अब तक जनसंख्या वृद्धि दर को अलग से दिए गए चार्ट से समझा जा सकता है। गाँव और शहर, पहाड़ और मैदान की जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अंतर गाँव और पहाड़ी क्षेत्र को लगातार कमजोर कर रहा है। इस बात को अलग से दिए गए जनसंख्या आकड़ों से समझ जा सकता है कि 1971 से हर दस वर्षों में जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अंतर के कारण गाँव और पहाड़ में नेतृत्व घट रहा है। 

अगर एक विधान सभा क्षेत्र खत्म होगा तो उस इलाके को एक साल में लगभग 200 करोड़ के बजट का घाटा होगा, ऐसे ही गाँव कि जनसंख्या घटने पर पंचायतों का अस्तित्व खतरे में या जाएगा। हमारा अनुमान है कि 2027 कि जनगणना के बाद उत्तराखंड में 1000 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है, और इसी अनुपात में सदस्य क्षेत्र पंचायत, सदस्य जिला पंचायत के पदों में भी कटौती होना स्वाभाविक है। इसके अलावा भारत सरकार एवं राज्य कि सरकार द्वारा पंचायतों को अलग अलग विभागों के माध्यम से जो जनसंख्या आधारित बजट आवंटित किया जाता है, योजनाएं स्वीकृत की जाती हैं उनमें भी भारी कटौती हो जाएगी। 

सरकार विधान सभा के परिसीमन का फार्मूला तय  कर सकती है, लेकिन  जनसंख्या आधारित बजट का फार्मूला पूरे देश में एक जैसा ही रहने वाला है। अगर हम अपने गाँव के प्रति जबाबदेही समझते हैं, अगर हमको अपनी जन्मभूमि से थोड़ा स भी लगाव है, अगर हमको अपनी पीटर भूमि कि प्रति आदर का भाव है तो इस का समाधान एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमको ही निकालना होगा और समाधान है कि जनगणना के समय हम वह सब लोग जो गाँव से बाहर रह रहे हैं जनगणना के लिए अपने गाँव में आकार गणना करवाएं। 

अपनी गणना अपने गाँव अभियान में हम राज्य के हर निर्वाचित प्रतिनिधि से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यास पीठ से कथा सुनाने वाले सम्मानित कथा वाचकों, राज्य के नामी गिरामी लोक गायकों, सोशल मीडिया मे प्रभाव रखने वाले साथियों, सेवा निवृत अधिकारी कर्मचारियों, प्रवासी संस्थाओं के पदाधिकारियों सबसे संपर्क साधकर इस पुनीत कार्य में सहयोग करने का आग्रह कर रहे हैं। 

हमको याद है कि जब कोरोना का कहर आया था उस कठिन दौर में हमारे प्रवासी मित्रों ने अपने पैट्रिक गाँव में आकार अपने को सुरक्षित पाया था, आज हम उन सभी प्रवासी मित्रों से आग्रह कर रहे हैं कि कोरोना में जिस धरती ने आपको आसार दिया आज वही धरती अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आपको पुकार रही है। आइए अपनी धरती माईं को प्रणाम करने के लिए परिवार सहित अपनी गणना अपने गाँव में करवाइए और अपने कर्तव्य का पालन कीजिए। 

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