ज्योति डोभाल संपादक
टिहरी : जनपद टिहरी गढ़वाल की साइबर अपराध शाखा द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करते हुए ई-सिम फ्रॉड के माध्यम से की गई ₹2,81,898/- की साइबर ठगी का सफल अनावरण किया गया है। प्रकरण में एक अभियुक्त को जनपद देवघर, झारखण्ड से गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्यवाही पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण में संपादित की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल आयुष अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार एवं पुलिस उपाधीक्षक/नोडल साइबर/सीआईयू के निकट पर्यवेक्षण में साइबर अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाया जा रहा है। प्रकरण की विवेचना प्रभारी साइबर शाखा को सुपुर्द कर शीघ्र अनावरण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
जानकारी के अनुसार शैलेन्द्र सिंह को अभियुक्त द्वारा स्वयं को जियो कंपनी का अधिकारी बताकर एक APK फाइल भेजी गई, जिसे डाउनलोड करते ही वादी का मोबाइल फोन हैक कर लिया गया। इसके पश्चात अभियुक्तों द्वारा वादी के मोबाइल नंबर पर ई-सिम जनरेट कर उसके बैंक खाते से ₹2,81,898/- की धनराशि को Amazon Wallet के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर लिया गया।
जब वादी द्वारा धन वापसी की मांग की गई, तो अभियुक्तों द्वारा और अधिक धनराशि की मांग की गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया। इस संबंध में थाना कैम्पटी, टिहरी गढ़वाल में मु0अ0सं0 12/2025, धारा 318(4) बीएनएस एवं 66C/66D आईटी एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया।
विवेचना के दौरान प्रकाश में आया कि अभियुक्त बबलू दास पुत्र दर्शी दास निवासी ग्राम बसवरिया, थाना देवीपुर, जिला देवघर (झारखण्ड) द्वारा इस साइबर अपराध को अंजाम दिया गया।
अभियुक्त द्वारा ई-सिम फ्रॉड के माध्यम से वादी के मोबाइल नंबर को अपने नियंत्रण में लेकर बैंकिंग एवं वॉलेट संबंधी जानकारी अन्य साइबर अपराधियों के साथ साझा की गई, जिसके माध्यम से विभिन्न खातों में लाखों रुपये का लेन-देन किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित खाते के विरुद्ध NCRP पोर्टल पर पूर्व में 06 शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए 27 मार्च को अभियुक्त को देवघर, झारखण्ड से गिरफ्तार किया गया। अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।
प्रकरण में अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी है। संबंधित बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जनसामान्य से अपील की है कि अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल/वीडियो कॉल से सतर्क रहें।
किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड न करें।
कोई भी सरकारी एजेंसी “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती है।
फर्जी निवेश योजनाओं एवं धन दोगुना करने के प्रलोभनों से बचें।
Google पर उपलब्ध कस्टमर केयर नंबरों की पुष्टि किए बिना कॉल न करें।
कहा कि यदि आपके साथ कोई साइबर/वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।


