स्वास्थ्य सुविधा देने में नाकारा साबित हो रही भाजपा सरकार: शान्ति प्रसाद भट्ट, प्रवक्ता/महामंत्री उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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रिपोर्ट : ज्योति डोभाल 


टिहरी : भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में स्वास्थ्य का अधिकार जीवन का अधिकार है, किंतु संविधान के इस अनुच्छेद का उत्तराखंड सहित टिहरी में खूब मजाक उड़ाया जा रहा है.

यह बात कांग्रेस प्रदेश महामंत्री व प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कही उन्होंने बीजेपी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वर्ष 2013 संपूर्ण उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए मैने एक जनहित याचिकासंख्या WP(PIL)120/2013 shanti pd Bhatt v.union of india and others उच्च न्यायालय में दाखिल की थी, तब उच्च न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने टिहरी में बल्ड बैंक स्थापित करने सहित अन्य निर्देश दिए थे, साथ ही तब सरकार ने निम्न सुविधाओं को चाक चौबंद करने का शपथ पत्र भी दाखिल किया था, जिनमे जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, प्रसुतिसेवा, बाल रोग, हड्डी रोग, नेत्र विज्ञान, ई.एन.टी.दंत विभाग, आपातकालीन सेवा (24*7), टीकाकरण, एस एन सी यू, आई सी यू, निश्चेतक विभाग, परिवार नियोजन, रेडियोलोजी, एक्स रे, सी. टी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, प्रयोगशाला (माइक्रोबालोजी, बायोकैसीमेस्ट्री, सिरोलोजी, हिस्टोपैथोलोजी,) ई.सी जी, रक्त भंडारण इकाई, फिजियोथैरेपी, औषधि, एम्बुलेंस आदि ,अभी इस याचिका पर सुनवाई जारी है,.

 उन्होंने कहा अगली तिथि पर मा. उच्च न्यायालय ने अतरिक्त शपथ पत्र के साथ टिहरी में हुए इस व्यापक फेर बदल से मरीजों को हुई परेशानी और स्टाफ की कमी सहित  अन्य समस्याओं से अवगत कराया जायेगा।

शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि जिला अस्पताल बौराडी नई टिहरी"सरकार और उसके नुमाइंदों के लिए प्रयोगशाल बनी हुई है।

   टिहरी जिले का जिला अस्पताल बौराडी सबसे बड़ा अस्पताल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने सभी सुविधाओं से सुसज्जित किया था,  कांग्रेस के शासन काल में ब्लड बैंक भी स्थापित किया गया था,ICU, सहित एक्स रे , अल्ट्रासाउंड मशीने, लैब, आयुष विभाग, आयुर्वैदिक, सहित ठीक ठाक यह अस्पताल संचालित हो रहा था, किंतु भाजपा की सरकार ने जिला अस्पताल बौराडी,  को निजी हाथों में प्रयोग के लिए दिया और अब वापस ले लिये?,, 

सरकार को बताना चाहिए प्रयोग सफल रहा या असफल? इन अस्पतालों में जो कर्मचारी निजी संस्थान ने लगाए थे, वे अब बेरोजगार हो गए, टिहरी की यह नियति रही है, कि हर पांच साल में 200 से अधिक लोग बेरोजगार हो जाते है, उनके पीछे उनके परिवार और उनके आश्रित भी मायूस होते है, रोजी रोटी का संकट एक साथ कई लोगों पर आन पड़ता है, स्थानीयजनप्रतिनिधियों का नाकारापन कहे या सरकार का सुनियोजित भ्रष्टाचार कहे, लेकिन इन दोनो परिस्थतियो में स्थानीय युवक/ युतियों को ही बेरोजगार होना पड़ा है।

टिहरी में सत्ता परिवर्तन के साथ हर बार 200 से अधिक लोगों का रोजगार सिर्फ इसलिए छीना जाता है ,कि वह उसके पूर्व के प्रतिद्वंदी के कार्यकाल में रोजगार पाए होते है, फिर नया जनप्रतिनिधि भी वही करता है, दो चार साल में कुछ लोगों को हटा कर,अपने कुछ ख़ास खास लोगों को चुन चुन कर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रोजगार दिला पाता है, किंतु तब तक चुनाव आ जाते है, और पूर्व के बेरोजगार हुए लोग उस जनप्रतिनिधि को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते है, जो रोजगार पाए होते है, वे इस डर से चुपचाप रहते है, कि कहीं हमारा रोजगार न छीन जाय। किंतु फिर वही कहानी दोहराई जाती है। यहीं हाल विगत समय में टिहरी बांध की एक कम्पनी  हिंदुस्तान कांस्ट्रसन कंपनी में भी 200से अधिक लोग बेरोजगार हुए थे, तब के जिम्मेदार लोगों ने अपनी गोटी बिछाने के लिए यह कृत्य किया था, और अब के जिम्मेदार लोगों ने भी वही इतिहास दोहराया है, इसलिए जनता भी इतिहास दोहराएगी।

      हमारी मांग है,सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, और बताए कि पांच साल के प्रयोग से क्या हासिल हुआ? 

प्रयोग सफल रहा या असफल?

सरकार युद्ध स्तर पर व्यवस्थाओ को चाक चौबंद करे, ताकी किसी भी मरीज और उसके तीमारदार को परेशानी न हो।जो लोग बेरोजगार हुए है, और जिन्होंने कोविड काल में लोगों की जानें बचाई, उनको समायोजन का भी कोई तरीका निकाला जाया।  

  टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय पर उन्होंने कहा कि आपने तो  वादा  मेडीकल कॉलेज बनाने का किया था लेकिन जिला अस्पताल को ही प्रयोगशाला बना कर रख दिया।

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