राजेश पसरीचा
हरिद्वार : आज मैं उत्तराखंड की बेटी इस न्यूज़ चैनल के माध्यम से अपना अनुभव साझा कर रही हूं.
मैं न्यूज़ चैनल की आभारी हूं व धन्यवाद देती हूं कि इस चैनल के माध्यम से मेरे अनुभव आप तक पहुंचे हैं
सिर्फ एक प्रकृति है जो कहीं कभी भेदभाव नहीं करती
आज हर इंसान अपने जीवन में सिर्फ सुख की चाह रखता है लेकिन वह सामने वाले को सुखी नहीं देखना चाहता फिर भला सुख कैसे प्राप्त कर सकता है यह कड़वा सच है कि व्यक्ति अपने जीवन में अपनी ही मानसिकता के कारण ही सुख और दु:ख का पात्र बनता है जबकि ईश्वर कभी किसी इंसान को दुख नहीं पहुंचाता !
उस ईश्वर द्वारा रचे हुए संसार में हमें किसी भी इंसान की निंदा या उसके प्रति गलत सोच नहीं रखनी चाहिए.
हर इंसान का यह प्रयास होना चाहिए कि हम सभी को एक सम्मान की दृष्टि से देखें यदि वे ऐसा नहीं भी कर सकते तो कम से कम उसके प्रति ईर्ष्या तो नहीं ही रखनी चाहिए यदि कोई व्यक्ति किसी के प्रति ईर्ष्या द्वेष रखता है तो वह सिर्फ अपनी मानसिकता का प्रमाण दे रहा है यदि हमारी मानसिकता किसी के प्रति अच्छी होगी और हम उसको एक सम्मान की दृष्टि से देखते हैं उसके सुख की कामना करते हैं तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि कुदरत हमें कभी दुख पहुंचाए हम कभी दुखी हो ही नहीं सकते हम एक अलग ही खुशी महसूस करते हैं एक कड़वा सत्य है यदि हम किसी कड़वे पदार्थ का सेवन करते हैं तो हमें कभी भी मिठाई का स्वाद नहीं आ सकता इसी प्रकार से व्यक्ति के जीवन में उसके स्वयं के विचारों से ही पीड़ा या सुख का अधिकारी होता है लेकिन आज कहीं कहीं व्यक्ति इस कदर अपनी मानसिकता से गिरते जा रहे हैं कि इंसान अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है कई दशकों पूर्व कहीं किसी परिवार की बेटी अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा प्राप्त कर किसी अच्छी नौकरी की उम्मीद लिए अपने गांव शहर का नाम रोशन करती थी तो पूरे गांव के लोग उस पर गर्व महसूस करते थे व बधाई देते थे कि हमारे गांव की बेटी ने आज इस मुकाम को हासिल किया है जिससे हमारे गांव का नाम रोशन हुआ है हालांकि उस दौर में गांव शहर की बेटियां बहुत कम बाहर शिक्षा ग्रहण करने जाती थी परंतु आज उन्ही गांव शहरों के समाज की मानसिकता कहां जा रही है यदि किसी की बेटी बाहर शिक्षा ग्रहण कर रही है तो उसके प्रति एक ऐसा नजरिया बना दिया है कि लोग तरह तरह की टिप्पणियां करते नहीं थकते क्या सिर्फ युवाओं को ही यह अधिकार रह गया है कि वह कहीं भी रहकर अपना कैरियर बना सके लेकिन आज व्यक्ति अपने परिवार से ज्यादा दूसरे के घर में ध्यान दे रहा है कि किसके परिवार में क्या चल रहा है व्यक्ति को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह किसी के भी बेटा या बेटी के लिए कुछ भी गलत भाषा या उसके प्रति ईर्ष्या रखकर उसको समाज में नीचा दिखाने की कोशिश करें आज इसी कारण से कुछ लोग अपनी बेटियों को बाहर शिक्षा ग्रहण के लिए नहीं भेज रहे हैं इससे उनके मन में एक ही डर रहता है कि कहीं हमारी बेटी को उनके ही समाज के लोग बदनाम ना कर दें जबकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आज बेटियां अपने ही गांव शहर परिवार में सुरक्षित नहीं है आखिर व्यक्ति कब और कैसे अपनी मानसिकता को बदलेगा कहीं कहीं लोग इतनी गलत नजर से किसी की बहन बेटी को देखते हैं और कुछ भी शब्दों का प्रयोग कर देते हैं इससे वह खुद की मानसिकता का प्रमाण देते हैं जबकि देश में आज लाखो बेटियां अपनी मेहनत और लगन से कई मुकाम हासिल कर देश की सेवाएं कर रही हैं यदि किसी गांव शहर की बेटी कलेक्ट्रेट बन जाती है तो उसको मिलने के लिए भी लोग तरसते हैं और यदि उसी कलेक्ट्रेट के घर में कोई महिला या बेटी उसके घर के कामकाज के लिए रहती है तो उसके प्रति व्यक्ति का नजरिया बदल जाता है व्यक्ति जिस नजरिए से किसी को देखता है उसका वैसा ही जीवन चरित्र बन जाता है जबकि आज भी कहीं-कहीं बहन बेटियों को लक्ष्मी का रूप मान कर पूजा की जाती है व एक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है व्यक्ति अपने जीवन में कितना भी धन दौलत अर्जित कर ले यदि उसका चरित्र सम्मान योग्य नहीं रहा तो वह धन कुछ भी नहीं रहा आज कुछ लोगों की मानसिकता इतनी गिर गई है कि किसी भी बहन बेटी के प्रति तंज कसते नजर आते हैं यही वजह है कि आज बेटियां खुद को अपने गांव शहर परिवार में सुरक्षित नहीं कर पा रही हर व्यक्ति यदि यह प्रण कर ले कि हमें किसी भी बहन बेटी के प्रति सिर्फ एक स्वच्छ विचार धारा रखते हुए उसे अपनी ही बहन बेटी कि तरह रक्षा करने का प्रयास करें तो इस देश की हर बेटी सुरक्षित रह सकती हैं
मैं उम्मीद करती हूं आपको मेरा अनुभव पसंद आया होगा.
लता जोशी
हरिद्वार उत्तराखंड


