विशेषज्ञों ने उतरकाशी जिले के नचिकेता ताल के पारिस्थितिकीय का किया अध्ययन

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वीरेंद्र नेगी 




उत्तरकाशी : प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ नचिकेता ताल झील पारिस्थितिकीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थान है। नचिकेता ताल उत्तरकाशी जिले के उत्तर-पूर्व में समुद्र तल से 2453 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह ताल 7 फिट गहरा और लगभग 200 मीटर लंबा और 30 मीटर चौडा है। घने देवदार और बांज तथा बुरांश के जंगलों के बीच बसे नचिकेता ताल वन्य जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण है। 


यह झील उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 29 किमी की दूरी पर स्थित है। एक स्थानीय किंवदंती के अनुसार, यह नचिकेताल झील उद्दालक द्वारा बनाई गई थी और इसका नाम उनके बेटे नचिकेता के नाम पर रखा गया था। 10 वर्षीय नचिकेता ने नरक और जीवन और मृत्यु के पीछे के द्वार की स्थापना की। इस रमणीक स्थल पर पहुंच कर गंगा विश्व धरोहर मंच से जुड़े विशेषज्ञों में हिन्दू कालेज दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान प्रोफेसर डॉ. रविन्द्र कुमार, इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. रूपेश व एफबीआई बोर्ड के सदस्य योगेन्द्र कुमार, गंगा विश्व धरोहर मंच के संयोजक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने स्थानीय वनस्पतियों के साथ ताल का इकोलॉजिकल अध्ययन किया।



 उन्होंने जानकारी दी कि इसके चारों ओर का वानस्पतिक जैव विविधता प्रकृति प्रेमियों के लिए मनमोहक दृश्य प्रदान करती है व इस ताल के आसपास पायेजाने वाली वनस्पतियों में मुख्यत: क्वेरकस ल्यूकोट्रिचोफोरा (Quercus leucotrichophora), क्वेरकस सेमीकार्पिफोलिया (Quercus semicarpifolia), क्वेरकस फ्लोरिबंडा (Quercus floribunda), रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम (Rhododendron arboreum), मायरिका एस्कुलेंटा (Myrica esculenta), लियोनिया ओवलिफोलिया (Lyonia ovalifolia), टैक्सस बकाटा (Taxus baccata),  शीर्ष स्थल पर अलनस नेपालेंसिस (Alnus nepalensis) जबकि जमीन की वनस्पतियों में प्रमुखत: रूबस एल्प्टिकस (Rubus ellpticus), बरबारिस एरिस्टाटा (Berbaris aristata), बरबारिस एशियाटिका(Berbaris asiatica), बरबारिस लिसेयुम (Berbaris lyceum) के अतिरिक्त कई औषधीय जड़ी-बूटियां (medicinal herbs)हैं जैसे पोटेंटिला फुलगेन्स (Potentila fulgens), वियोला बेटोनिसिफोलिया (Viola betonicifolia), बर्जेनिया सिलियाटा (Bergenia ciliata), रोजा ब्रूनोनी (Rosa brunonii), अजुगा ब्रैक्टियोसा (Ajuga bracteosa), ओसीमम ग्रैटिसिमम (Ocimum gratissimum) आदि प्रजातियां हैं।



 इस ताल में पायी जाने वाली सिप्रिनस कार्प प्रजाति की मछलियां भी इसके सौन्दर्य को बढ़ाती हैं। लेकिन ताल के आसपास विद्यामान वनस्पतियों व मत्स्य प्रजाति का उचित संरक्षण काफी जरूरी है जिसके लिए ठोस पहल की जानी चाहिए। उन्होंने ताल के आसपास विखरे अजैविक कूड़े प्लास्टिक की बोतलें व पालीथीन को ताल के जलीय पारितंत्र के लिए खतरनाक बताया व लोगों से ताल के आसपास कचरा न फेंकने की अपील भी की। 


इस अवसर पर गायत्री नोटियाल, राकेश अवस्थी, श्रयेश, वृजमोहन नौटियाल, मयंक आदि मौजूद थे।

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