रिपोर्ट : ज्योति डोभाल
नई टिहरी -जल जीवन मिशन के तहत दूसरे चरण/पूर्ण डीपीआर की समीक्षा को लेकर जिला स्तरीय जल जीवन मिशन समिति की बैठक जिला अधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई।
जल संस्थान द्वारा तैयार पूर्ण डीपीआर में औसतन प्रति संयोजन/एफएचटीसी खर्च 55 हजार जबकि जल निगम द्वारा तैयार डीपीआर के अनुसार प्रति एफएचटीसी औसतन खर्च 80 हजार रुपये है। जिसको देखते हुए समिति द्वारा जल संस्थान की 121 डीपीआर को स्वीकृत किया जबकि जल निगम की 79 डीपीआर को एक सप्ताह के लिए पुनः निरीक्षण हेतु वापिस किया गया। जल संस्थान के सापेक्ष जल निगम के प्रति एफएसटीसी खर्च को देखते हुए जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों को डीपीआर का बारीकी से निरीक्षण करते हुए डीपीआर 01 सप्ताह के भीतर पुनः प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे जल संस्थान द्वारा बनाई गई डीपीआर का अवलोकन अवश्य करें ताकि प्रति एफएसटीसी खर्च को कम किया जा सके।
जल संस्थान की टिहरी डिविजन का औसतन प्रति संयोजन/एफएचटीसी खर्च 49 हजार, घनसाली 56 हजार जबकि देवप्रयाग डिवीज़न में यह खर्च 83 हजार रुपये है। वहीं जल निगम टिहरी डिवीजन का औसतन प्रति एफएचटीसी खर्च 99 हजार, चम्बा 80 हजार, घनसाली 72 हजार, मुनिकीरेती 79 हजार व देवप्रयाग डिवीजन में प्रति एफएसटीसी औसतन खर्च ₹1लाख 10 हजार रुपये है।
इसके अलावा टाटा ट्रस्ट (हिमोत्थान) द्वारा 7 राजस्व गांवो में जल जीवन मिशन का कार्य किया जा रहा है जिसमे विकासखण्ड भिलंगना के 5 गांव, चम्बा का 01 व 01 गांव जौनपुर का शामिल है।
बैठक में अधीक्षण अभियंता जल संस्थान यशवीर मल्ल, अधीक्षण अभियंता जल निगम इमरान अहमद, अधिशासी अभियंता जल संस्थान सतीश नौटियाल, अधिशासी अभियंता जल निगम आलोक कुमार, पूर्व ब्लाक प्रमुख जखणीधार बेबी असवाल, परमवीर पंवार के अलावा जल संस्थान व जल निगम की अन्य डिवीजनों के अधिशासी अभियंता उपस्थित थे.

