Team uklive
टिहरी : नरेंद्र नगर विकासखंड के गजा तमियार मोटरमार्ग पर तमियार में बना वनविश्राम गृह सरकारी तंत्र और बन विभाग की उपेक्षा के कारण आज अंतिम सांसें गिन रहा है । सन् 1962-63 के दशक में यह बनविश्राम भवन तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी दयाराबाग टिहरी चैन सिंह द्वारा बन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के लिए बनवाया गया था । यहां तक बन विभाग की सड़क गजा से बनी हुई थी ताकि चीड़ के पेड़ों के लकड़ी के स्लीपर ले जाये जा सके ।उस समय इस सड़क का नाम जंगलात रोड़ था जो अब पी एम जी एस वाई विभाग बना रहा है ।यह बनविश्राम भवन दो भागों में बना था । एक रेस्ट हाउस तथा दूसरा आउट हाउस ।आउट हाउस में कर्मचारियों के रहने व भोजन आदि बनाने का काम होता रहा ।यहां पर बिश्रामगृह का साइन बोर्ड लगा था तथा चाबी तमियार गांव निवासी कृपाल सिंह रावत के पास रहती थी जो उस समय पार्ट टाइम चौकीदार 15 रु. के मस्टरोल पर कार्यरत थे ।बाद में बन विभाग ने 15 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिमाह कर दिये । 10 साल पहले कृपाल सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद अब यह बिश्रामगृह लावारिस हालत में है तथा जीर्ण शीर्ण अवस्था में है । गजा से महज 8 किलोमीटर दूर बांज काफल चीड़ के घने जंगल के साथ तमियार गांव में रमणिक जगह पर है । यहां पर आजकल पी एम जी एस वाई निर्माण कार्य करने वाले कम्पनी का स्टाफ है ।किसी जमाने में यहां गजा से टेलीफोन की लाइन की सुविधा थी ।चीड़ के पेड़ों पर सफेद रंग के चूना मिट्टी के चमकीले टाप कप लगे मिलते हैं ।1989-90 दशक में विजेन्द्र सिंह जाफा व उसके बाद आयुक्त सुरेन्द्र सिंह पांगती भी यहां पर रुके हैं
लेकिन अब यह भवन लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है । यह खंडहर में तब्दील हो कर अंतिम सांसें गिन रहा है ।



