श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से हटाए गए कर्मचारियों के परिवारजन 13 अगस्त को विश्वविद्यालय में धरना देंगे

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रिपोर्ट : ज्योति डोभाल 

नई टिहरी:-दो साल पहले श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से निकाले गए 40 से ज्यादा कर्मचारियों के परिवार भुखमरी की स्थिति में आ गए हैं। उनका सब्र भी अब जवाब देने लगा है। आउटसोर्सिंग की नौकरी और बहुत कम तनख्वाह में इन लोगों ने विश्वविद्यालय की दिन-रात सेवा की। कम तनख्वाह में जैसे तैसे अपना घर खर्च चलाया किंतु 2 साल पूर्व इन लोगों को हटा दिया गया।विगत 2 सालों से यह लोग शासन/प्रशासन/ विश्वविद्यालय से लेकर जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं।विश्वविद्यालय तथा विभागीय मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों के द्वारा इन्हें समय-समय पर वापस लिए जाने के आश्वासन ही मिले। किंतु अब इनका सब्र जवाब दे गया है क्योंकि इनके घरों में कमाने वाले शख्स का 2 साल से घर पर बैठना और भुखमरी जैसी स्थिति होने से यह लोग करो या मरो की स्थिति में आ गए हैं।

इनके बीवी बच्चे तथा परिवार के लोगों ने अब यह निर्णय लिया है कि न्याय पाने की निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।

इनके परिवार के सदस्यों तथा तमाम सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों एवं प्रतिनिधियों ने भी इनके साथ हो रहे अन्याय के लिए आवाज उठाने का निर्णय लिया है।

निर्णय लिया गया कि दिनांक 13 अगस्त को विश्वविद्यालय के प्रांगण में इनके परिवार सहित तमाम सामाजिक लोग एक दिवसीय धरना देंगे तथा विश्वविद्यालय और शासन को यह चेतावनी दी जाएगी कि यदि शीघ्र ही इन लोगों को वापस नियोजित नहीं किया जाता तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के उक्त निकाले गए कर्मचारियों के समर्थन में सबसे पहले आवाज उठाने वाले पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय  ने कहा कि वे स्वयं इनके परिवारजनों के साथ उक्त धरने में उपस्थित रहेंगे तथा सरकार से इनकी मांगे पूरी करने का निवेदन करेंगे। उपाध्याय ने कहा कि यह लोग तमाम जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट काट कर थक गए हैं। उनके पास भी ये लोग कई बार आए और उन्होंने भी अपने स्तर से विश्वविद्यालय,सरकार तथा विभागीय मंत्री को इनकी मांगे माने जाने का निवेदन किया किंतु टिहरी के लोगों को उपेक्षित रखना हमारे नीति नियंताओं के मन में है। किंतु अब टिहरी की उपेक्षा नहीं सही जाएगी। उन्होंने कहा कि लंबी भूख हड़ताल के बाद भाजपा की निशंक सरकार से उन्होंने इस विश्वविद्यालय को यहां पर स्थापित करवाया था किंतु आज इस विश्वविद्यालय की दुर्दशा हो चुकी है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उक्त कर्मचारियों को विश्वविद्यालय द्वारा वापस नहीं लिया जाता तो वह भी इनके परिवारजनों के साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन में सहभाग करेंगे।श्री किशोर उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय का एक परिसर टिहरी में स्थापित किया जाए।

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