अपनी मांगो को लेकर उत्तराखंड वन श्रमिक संघ ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

Uk live
1

 रिपोर्ट : ज्योति डोभाल 

टिहरी : उत्तराखंड वन श्रमिक संघ टिहरी नई टिहरी इकाई ने दैनिक श्रमिको की मांगो के सम्बन्ध मे टिहरी बिधायक धन सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया. 

जिसमे उन्होंने कहा कि वन बिभाग मे बिगत कई वर्षो से कार्यरत दैनिक श्रमिको द्वारा अपना जीवन प्रदेश और बिभाग के लिए न्योछावर कर देते हैं. प्रदेश के सभी वन श्रमिक वन तस्कर, वनाग्नि नियंत्रण एवं मानव वन्य जीव संघर्ष सम्बंधित घटनाओ का सामना करते आ रहे हैं एवं कोविड -19 जैसी महामारी मे भी अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ देते आ रहे हैं. 
किन्तु बिभागीय उदासीनता के कारण दैनिक श्रमिको का जीवन अंधकारमय हो गया है. 
संघ ने पत्र मे कहा कि नये मुख्यमंत्री बनने से आशा की नई उम्मीद जगी है अतः बिभाग द्वारा 2016 की नियमावली को संशोधन कर पूर्व नियमावली 2003 की भांति किया जाये. 
जिससे बिभाग मे लगे श्रमिको को पूर्व की भांति पैंसठ प्रतिशत बिभागीय आरक्षण एवं बिनियमितीकरण मे दैनिक श्रमिको का समायोजन हो सके. 
संघ ने मुख्यमंत्री से अपनी मांगो को लागू करवाने की मांग की है.

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ
  1. संस्कृति का प्रश्न संस्कृति लुप्त होती नजर आ रही है हर व्यक्ति स्वार्थी और लालची नजर होता है आ रहा है सत्य लुप्त नजर होता आ रहा है असत्य का राज चारों दिशाओं में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है हर एक व्यक्ति अपना दायित्व सही ढंग से नहीं निभा पा रहा है वह सिर्फ शारीरिक सुख की सुविधाओं के लिए यह सब किए जा रहा है लेकिन सत्य का साथ कोई नहीं दे पा रहा है हर पदों पर आत्म स्वार्थी और लालची अत्यधिक मात्रा में बैठे हुए हैं जिनका मुख्य उद्देश्य धन इकट्ठा करना है और उससे शारीरिक सुख प्राप्त करना है उनका उद्देश्य संस्कृति को बचाना नहीं शारीरिक सुख भोगना है सभ्यता और संस्कृति को लुप्त करने में सबसे बड़ा हाथ उन सभी पदाधिकारियों का है जो इस राष्ट्रीय के पदों पर विराजमान है लेकिन वह सत्य के प्रति अपने कर्तव्य निष्ठा से अपने पद का सही पालन नहीं कर पा रहे हैं यह मेरे जीवन का अनुभव है और यह परम सत्य भी जो अनुभव मेरे 36 वर्ष की जीवन में मुझे प्राप्त हो रहे है जिसमें एक घटना 36 वर्ष के मेरे यह जीवन में मुझे देखने को मिलती है जो मुझे मनुष्य के इस जीवन का अनुभव सिखाती है जिससे लगता है की धारा से सत्य लुप्त होता नजर आ रहा है धारा में संस्कृति प्रकृति को बचाने पर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे हमारे देश के संस्कार और सभ्यता दिन प्रतिदिन लुप्त होती नजर आ रही है हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार दिखाई दे रहा है मेरे जीवन की एक घटना जिस पर मेरा प्रयास और उस प्रयास में सिर्फ असफलता असफलता सिर्फ इसलिए की सत्य के प्रति किसी का ध्यान नहीं और असत्य पद पर चल कर मैं हासिल करना चाहता नहीं मेरे जीवन की एक अत्यंत दुखद घटना मेरे पिता द्वारा जनहित कल्याण के लिए जीव कल्याण के लिए और परिवार पालन पोषण के लिए आत्म निर्भर के लिए और प्रकृति को बचाने के लिए एक सुंदर सा बाग लगाया गया जिसका मुख्य उद्देश्य प्रकृति को बचाना था दिनांक 11/4/2021 को वन अग्नि की आग लगने के कारण यह पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया जिस को बचाने के लिए अनेकों ग्रामीणों का संघर्ष रहा जिससे इस बाग में कुछ पेड़ ही बच पाए जिसमें वन विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही रही कि वन विभाग के कर्मी अपने पद का सही तरह से पालन नहीं कर रहे हैं जिसके चलते यह बाग जलकर नष्ट हो गया है यह घटना ग्राम गौल ठकराल किसान भगवती प्रसाद किसान सचिन प्रसाद पिता का नाम श्री श्री नंद बिजलवाण जिनके द्वारा यह बाग लगाया गया था जिसकी जलने की खबर खबर प्रार्थी द्वारा थाना बड़कोट जिला उत्तरकाशी तहसील बड़कोट को दी गई सभी पत्रकार बंधुओं को दी गई तहसीलदार महोदय उप जिलाधिकारी महोदय जिलाधिकारी महोदय उद्यान विभाग अधिकारी महोदय पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे जिला अध्यक्ष उत्तरकाशी ऐसे अनेकों पदाधिकारियों को इस घटना से अवगत करवाया गया जिस पर कोई कार्यवाही तक नहीं हुई लक्ष्य प्राप्ति की जीद को लेकर किसान द्वारा अनेकों प्रकार से संघर्ष किया गया जिससे निरीक्षण भी हुआ लेकिन किसान के प्रति किसी का दर्द नहीं झलका क्योंकि किसान यह लड़ाई सत्य पर लड़ रहा है किसी को कुछ भी नहीं दे रहा सिर्फ यही चाह रहा जो सत्य है उसी को उजागर करो और आप हम का क्या दायित्व है प्रकृति को बचाने के प्रति उसे पूरा करो किसान का जीवन का लक्ष्य 5000 पेड़ लगाना और प्रकृति को हरा भरा बनाना एक डेढ़ सौ पुत्र समान यही भाव से सेवा करता है और यदि किसी का कोई भी सहयोग नहीं मिला तो भी किसान इस लक्ष्य को जरूर पूरा करेगा क्योंकि किसान के पिता का यह सपना था यह लक्ष्य था जो किसान से कहा करते थे की पुत्र साथ दे ना दे कोई पता नहीं लेकिन यह पेड़ निस्वार्थ भाव से जगत की सेवा करेंगे पुत्रों से ज्यादा वह पेड़ों पर ध्यान देते थे किसान वक्त के आने पर सभी से इन प्रश्नों के उत्तर पूछेगा की जगत हित कार्य करने वालों के साथ इस तरह का ना इंसाफ क्यों होता है क्यों किसी किसान पर किसी लाचार पर और गरीबों पर इस तरह का अन्याय क्यों होता है क्योंकि यह किसी के साथ समझौता नहीं करते क्योंकि यह सत्य राह पर चलते हैं यही कारण है जीवन का लक्ष्य सत्य के प्रति अपनी फौज तैयार करना और सभी पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों का विरोध करना और सत्य को उजागर करना ही कर्तव्य है हमें किसी न किसी को इस भूमिका के लिए तैयार होना है और एक सत्य की पार्टी बनानी है सत्यमेव जयते यही संकल्प यही संघर्ष इसी नारे के साथ आगे बढ़ेंगे जय हिंद जय भारत जय उत्तराखंड

    जवाब देंहटाएं
एक टिप्पणी भेजें
Uk live चेनल / ब्लॉग उत्तराखण्ड के साथ साथ अन्य राज्यों के लोगों की मूलभूत समस्याओं को उठाने के लिए…
To Top