योग का मतलब केवल आसन और प्राणायाम करना मात्र नहीं है , जबकि लोग ऐसा ही समझते हैं -सुशील बहुगुणा

Uk live
0

रिपोर्ट : ज्योति डोभाल 

टिहरी : योग दिवस पर योग सेंटर तपोवन के द्वारा आयोजित ऑनलाइन योग प्रशिक्षण के शुभारम्भ पर सुशील बहुगुणा द्वारा कही गयी उन्होंने ऑनलाइन वर्चुयल मीटिंग मे कहा कि योग के आठ अंग है । अष्टांग योग में यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान तथा समाधि का समावेश है । यम में अहिंसा , सत्य , अस्तेय , ब्रह्मचर्य , अपरिग्रह पांच विभाग हैं । इन्हें जैन धर्म में महाव्रत कहा गया है । यदि इनमें से एक का भी पालन कर लेंगे तो आपका जीवन सफल है । अहिंसा का मतलब है किसी को भी कष्ट न पहुंचाना । न मन से , न वाणी से और न शरीर से । आप सिर्फ अहिंसा का पालन करेंगे तो सभी का पालन हो जाएगा । सत्य का आचरण करेंगे तो बाकी का भी आचरण हो जाएगा । ये सभी एक - दूसरे से जुड़े हैं । जब हम जीवन में इनका पालन कर लेंगे तो हमें सत्य का मार्ग हासिल हो जाएगा । यम और नियम आपस में जुड़े हैं । अगर हम इनका पालन करें तो देश का प्राचीन गौरव प्राप्त कर सकते हैं । मनुस्मृति में कहा गया है कि हमारे भूमंडल में उत्पन्न हुए विद्वान लोगों की संगति और सान्निध्य से अपने चरित्र को शिक्षित करें यानी उनके चरित्र और आचरण को देखकर अपनाने का प्रयत्न करें । सभी अपनाएंगे , तभी मनुष्य वास्तव में मनुष्य कहलाने का अधिकारी होगा । मनुष्य और पशु में सिर्फ विवेक का अंतर है । बाकी सब चीजें वही हैं । धर्म का अर्थ भी कर्तव्य व कर्म करना है । कर्तव्य ही धर्म है । जब तक आप कर्तव्य पूरे नहीं करेंगे , तब तक आप मनुष्य कहलाने के अधिकारी नहीं हैं । केवल आपको मनुष्य का शरीर मात्र मिला है ।

इस अवसर पर योग सेंटर के योगाचार्य आशीष  ने विभिन्न आसन के बारे मे जानकारी दी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)
Uk live चेनल / ब्लॉग उत्तराखण्ड के साथ साथ अन्य राज्यों के लोगों की मूलभूत समस्याओं को उठाने के लिए…
To Top