रिपोर्ट : ज्योति डोभाल
नई टिहरी : सरकार द्वारा टिहरी जिला अस्पताल को पीपीपी मोड पर जोलीग्रांट अस्पताल को देना स्थानीय लोगों के लिए महगा साबित हो रहा है.
आये दिन इस अस्पताल मे कोई भी मामूली केस आने पर मरीज को जोलीग्रांट के लिए रैफर कर दिया जाता है.
मुख्यमंत्री तीरथ रावत के द्वारा अभी हाल ही मे स्वयं इस अस्पताल का निरिक्षण किया गया. उनके द्वारा भी अस्पताल प्रबंधन को सख्त हिदायत दी गई थी कि अस्पताल किसी भी मामूली केस मे रैफर ना करें वरन यहीं पर मरीज को ट्रीटमेंट दिया जाये परन्तु अस्पताल प्रबंधन मुख्यमंत्री के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहा है.
ताज़ा मामला शुक्रवार शाम का है जहाँ पर छोलगाँव निवासी डबल सिंह बाइक से गिरने के कारण उनके पैर के घुटने की हड्डी फ्रेक्चर हो गई थी जो कि अस्पताल मे ही ठीक की जा सकती थी परन्तु अस्पताल प्रबंधन ने मामूली कच्चा प्लास्टर बांध कर उनको भी जोलीग्रांट के लिए रैफर कर दिया.
हालांकि उनके परिजन उनको ऋषिकेश एम्स मे ले गए. अब सवाल यह उठता है कि पीपीपी मोड संचालित जिला अस्पताल क्या खानापूर्ति कर रहा है.कई बार अस्पताल की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने अस्पताल का औचक निरिक्षण भी किया परन्तु हर बार अस्पताल कोई ना कोई बहाना कर अधिकारीयों को भी भ्रमित करने का कार्य कर रहा है.
ऐसे मे लोगों के लिए भी काफी दिक्क़ते आ रही है. कई लोगों का कहना है डिलीवरी केस मे भी अस्पताल परिजनों को लटका के रखता है और ऐन वक्त पर हाथ खड़े कर देता है.
मामूली से मामूली बीमारी मे भी अस्पताल लोगों को रैफर कर रहा है जिससे लोगों मे अस्पताल प्रबंधन को लेकर गुस्सा साफ नजर आता है.

