गंगा दशहरे के दिन गंगोत्री धाम में श्रद्वालुओ बिन सुना पड़ा धाम. देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ गंगा पुरोहित

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रिपोर्ट : वीरेंद्र नेगी 

उत्तरकाशी : उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगोत्री (गोमुख ) वह स्थान है जिसे गंगा नदी का उद्गम स्थल मानते हैं। यहां गंगा नदी ने धरती को छुआ था। राजा भगीरथ के प्रयास से गंगा पहले भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हुई और फिर आगे गंगोत्री से मुख्य धारा बनाकर आगे बढ़ी।

गंगा नदी 3 देशों के क्षे‍त्र का उद्धार करती है- भारत, नेपाल और बांग्लादेश।  प्रदेशो कि बात कि जाय तो  उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल और फिर दूसरी ओर से बांग्लादेश से होती हुई  यह बंगाल की खाड़ी में समा जाती है।

 गंगा दशहरे के दिन गंगोत्री धाम में श्रद्वालुओ कि बड़ी संख्या काफी भीड़ होती हैं. आज के दिन ये महोत्स्व कोरोना संक्रमण कि भेंट चढ़ गया. उत्तराखंड सरकार ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए श्रद्वालुओ का गंगोत्री धाम में वर्जित कर रखा हैं. जिसमे सिर्फ गंगा पुरोहित ही गंगोत्री धाम में राजा भगीरथ व् माँ गंगा कि पूजा अर्चना कर रहे हैं.

वही दूसरी और चार धामों के पुरोहित देवस्थानम बोर्ड के फिलाफ सरकार से नाराजगी भी दिखा रहे हैं. आज गंगा पुरोहितो ने गंगा दशहरे के दिन विधि विधान से पूजा तो किया. वही दूसरी और सरकार व् देवस्थान के विरुद्ध भी दिखे.

 गंगा पुरोहितो के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा गंगा दशहरे के दिन विधिविधान से पूजा पाठ भी किया जायेगा. साथ ही सरकार को सत्बुद्धि दे माँ गंगा इस पर भी पूजा पाठ भी किया जायेगा. 


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