रिपोर्ट.... वीरेंद्र नेगी
उत्तरकाशी... कोविड-19, महामारी की दूसरी लहर ने हमारे देश को भयानक जद में ले लिया है। उत्तराखंड राज्य भी इससे अछूता नही है। अभी भी समय रहते कठोर फैसले नहीं लिये गये तो स्थिति और भयावह होने वाली है।
कोरोना संक्रमितों के मामले में उत्तराखंड अब देश मे चौथे नंबर पर आ गया है। दिन ब दिन मरने वालों के आंकड़े बढ़ते जा रहे है। हर तरफ हाहाकार है, लोग चीखते बिलखते अपने सामने अपनों को खोता देख रहे है। सरकारी तंत्र इस महामारी के आगे फैल हो चुका है। पिछले एक डेड साल से जितना जोर चुनावी प्रचार और सत्ता लोलुपता में दिखाया गया उसका कुछ हिस्सा भी कोरोना से लड़ने के लिये वुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने में लगाया होता तो आज ये दिन नही देखने पड़ते।
इस एक साल में क्या नहीं किया गया?.... फ़ोटोबाजी और झूठ बोलने में साल निकल गया, और इतने लोग बेमौत मारे गए। जब पता था कि महामारी गई नहीं फिर क्यों चुनावी दंगल और विराट कुम्भ मेले में नियमों की अनदेखी की गई?
आज हम सब मजबूरी के चौराहे पर खड़े हैं। अपनों को खो रहे हैं। कुछ नहीं कर पा रहे हैं। सवाल पूछिए कि एक साल में क्या हुआ ?
ज़ोर से पूछिए क्यों नहीं आपके ज़िले में पचास सौ वेंटिलेटर लगाए गए क्यों ?
इस खतरनाक दौर में तो बस अब जिंदा रहना ही एक बड़ी चुनोती बनी हुई है। अभी भी हमारी सरकार कुछ कड़े कदम उठकर इस चेन को तोड़ने के कारगर उपायों पर गहन विचार करें, वर्तमान परिस्थिति के अनुसार इंसानियत की रक्षा के लिये ऐसा किया जाना अत्यंत आवश्यक है।


