टिहरी.... वन का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।अनेक आर्थिक समस्याओं का समाधान इन्हीं से होता है। ईंधन, कोयला, औषधियुक्त तेल व जड़ी-बूटी, लाख, गोंद, रबड़, चंदन, इमारती सामान और अनेक लाभदायक पशु-पक्षी और कीट आदि वनों से ही प्राप्त होते हैं।
पहाड़ों मे आजकल वन धधक कर जल रहे हैँ
इन प्राकृतिक कारणों से या मानव-जनित कारणों से वनों में आग लगने से वनों का तीव्र गति से तथा अल्प समय में विनाश होता है।
रॉड्स अध्यक्ष एवं बीजेपी नेता सुशील बहुगुणा ने बताया कि मुझे याद है मै जब छोटा था और 07 क्लास मे पढ़ता तब हमारे गांव के जंगल मे आग लगी. लेकिन जैसे ही आग लगी हमारे गांव के महिला मंगल दल व युवक मंगल दल ने एक ही आवाज पर करीब दो सौ लोग आग बुजाने चले गये |
पर आज जंगलो मे आग लगने पर इस तरह का नजारा दिखता नही. आज आग जब तक मेरे घर तक न आ जाय तबतक आदमी निश्चिन्त हो कर व्हाट्सप्प व फेसबुक पर ज्ञान बाँट रहा है |
आखिर हम किस तरफ इस समाज को ले जाना चाहते हैँ |
कब हम आनी वाली पीढ़ी को सामाजिक उत्तरदायित्व को समझा पा सकेंगे |
पहले समाज मे अपने से बड़े आदरणीय होते थे |बड़े भी अपने से छोटे के सामने आदर्श स्थापित करते थे आजकल की तरह बड़े नही जो खुद ही बच्चों को शराब परोस रहे हैँ |
इसी तरह आज से 30साल पहले वनों मे आग के कारण जलते हुऐ नही दिखा जाता था |
वनों में आग के कारण मिट्टी, पौधों की जड़ों तथा पत्तियों के ढेरों में रहने वाले सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। स्पष्ट है कि वनों में आग लगने या लगाने से न केवल प्राकृतिक वनस्पतियों का विनाश होता है तथा पौधों का पुनर्जनन अवरुद्ध हो जाता है, वरन् जीवीय समुदाय की भी भारी क्षति होती है, जिसके कारण पारिस्थितिकीय असंतुलन उत्पन्न हो जाता है


