सम्पादकीय लेख....
असम.. असम के बिधानसभा चुनाव मे बीजेपी प्रत्याशी की गाड़ी से evm मशीन मिलना बिना कहे बहुत कुछ बयां कर रहा है.
क्या बीजेपी को अपने पर भरोसा नहीं रह गया जो वह evm के भरोसे है. आज देश के टैक्सपेयर का पैसा कहाँ जा रहा है चुनाव आयोग क्यों सत्तारुढ पार्टी के हाथो की कठपुतली बनता जा रहा है इस पर विचार किया जाना आवश्यक हो जाता है. यहाँ पर हमें ये भी समझना होगा कि हमारा देश आज किस दिशा मे जा रहा है
क्या इस देश मे चुनाव केवल खानापूर्ति और जनता कि आँखों मे धूल झोंकने के लिए किया जा रहा है क्या यहाँ लोकतंत्र कि हत्या नहीं हो रही है ये हमारे लिए एक गंभीर प्रश्न है जिस पर विचार किया जाना अति आवश्यक हो जाता है.
जिस प्रकार से हमारे देश मे कही पर evm मे गड़बड़ी की शिकायत और अब बीजेपी प्रत्याशी की गाड़ी से evm मिलना लोकतान्त्रिक देश के लिए खतरा बनता जा रहा है.
एक जमाना था जब हम अंग्रेजो के गुलाम हुआ करते थे उस वक्त जो अंग्रेज सोचते थे उसको करते थे बिना कुछ पूछे और भारतीय केवल खून के आंसू रोता था क्योंकि वो मजबूर था कुछ कर नहीं सकता था वैसे ही हालात आज बीजेपी ने पूरे देश मे खड़े कर दिये हैं. लोकतान्त्रिक देश को बीजेपी ने अंग्रेजो की गुलामी वाला देश बना कर रख दिया है. आज किसान सड़क पर है, युवा बेरोजगारी की कगार पर खड़ा है, युवाओ की डिग्रियां कागज मे बदलती जा रही है परन्तु सरकार को किसी की परवाह नहीं है क्या इसके पीछे evm पर भरोसा है कि जीतना तो हमने ही है तो फिर चुनाव कराने का क्या फायदा.
क्यों जनता के पैसों को बर्बाद किया जा रहा है जब सब कुछ सेटिंग से ही होना है.
ये बहुत चिंतनीय प्रश्न है जिस पर अब बिचार करने का समय आ चुका है.
इस देश के नागरिक को अपना कर्तब्य समझते हुए आगे आना ही होगा और जो गलत हो रहा है उसका विरोध करना ही होगा तभी इस देश मे लोकतंत्र जीवित रह सकता है नहीं तो हमारा ये भारत देश चीन और उत्तरी कोरिया कब बन जायेगा हमें पता भी नहीं चलेगा.
क्रमशः...


