विपक्ष पूछे सवाल. शासन व प्रसाशन बैठा खामोश. क्या देश कि जनता का ऐसे ही मुखोल उड़ाया जायेगा

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 रिपोर्ट... वीरेंद्र नेगी

उत्तरकाशी....  सरकार के अनुयोजित फैसलों और पिछले एक डेढ़ वर्षों से लापरवाह प्रशासनिक कार्यशैली से एक बार फिर जनता को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआत में देश-प्रदेश सहित जनपद के प्रत्येक नागरिक ने सरकार के हर फैसले में साथ दिया, किन्तु अब जब एक से डेढ़ वर्ष का समय व्यतीत हो चुका है, और सरकार को व्यवस्थाएं जुटाने का भरपूर समय भी मिला, फिर क्यों आज ऐसी परिस्थिति बनने जा रही है कि देर सवेर ही सही लॉकडाउन करना ही अंतिम विकल्प बचेगा।


 देशभर में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आज भी जिम्मेदारी केवल जनता के कंधों पर डालकर सरकार अपना इतिश्री कर रही है। पिछले लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था की रीढ़ हिल चुकी है, किसान, व्यापारी, होटल व्यवसायी, टैक्सी, मैक्स, कैब, परिवहन एवं चारधाम व्यवसाइयों की आर्थिकी अत्यंत खराब हो चुकी है।



 इनके सामने रोजी रोटी का गहन संकट है, ऐसे में यदि इस वर्ष भी यात्रा सीजन चौपट रहती है तो इन व्यवसाइयों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा। 

पिछले वर्ष से मुख्यमंत्री राहत कोष और PM रिलीफ फण्ड में सक्षम जनता ने अपने देश प्रदेश के दीनहीन लोगों की सहायतार्थ बहुत सारी धनराशि भी दान की है। किन्तु सरकार द्वारा किसी भी स्तर पर कोई भी समुचित राहत राशि किसी भी प्रकार के व्यवसायी एवं नागरिक को नही दी गयी।


 जनता के दान के पैसों का कोई हिसाब किताब भी कभी सार्वजनिक नही हुआ, कोविड़ सुरक्षा के नाम पर सरकारी गाड़ियों और बंगलों को जरूर चमकाया गया, इसमे सेनेटाइजर, मास्क और अन्य उपकरणों में करोड़ों का घोटाला होने की आशंका से भी इंनकार नही किया जा सकता, फिर क्यों? और कैसे? कोई यकीन कर लें कि सरकार हमारे लिए बेहतर कर रही है।


 आज प्रदेश का हर नागरिक वैश्विक महामारी से लगे अनुयोजित लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में सरकार कोई भी फैसला लेने से पहले जनता को विश्वास में लेकर हर नागरिक की आर्थिकी को दृष्टिगत रखते हुए ही कार्य करें। जिससे महामारी के अलावा भुखमरी और बदहाली से भी बचा जा सके।

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