रिपोर्ट.... नदीम परवेज
धारचूला... धारचूला अस्पताल में विद्युत की कोई भी व्यवस्था नहीं आंतरिक कमरों में इमरजेंसी में कहीं भी विधुत व्यवस्था नहीं थी कल रात 1:30 पर विद्युत धारचूला की मौसम खराब होने से चली गयी थी ।
जो आज रात 8:30 बजे तक आ नहीं पाई थी जिसके कारण धारचूला विद्युत से भंग था
परंतु धारचूला के अस्पताल में जनरेटर और इनवर्टर होने के उपरांत भी धारचूला के अस्पताल में केवल आवासीय परिसर में डॉक्टर और नर्सों के स्टाफ रूम में विद्युत व्यवस्था थी। मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी इसमें कहने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं थी मोबाइल के रोशनी पर एक्सीडेंट केश के टांके लगाए जा रहे थे जो कि एक बहुत बड़ा सोचनी प्रश्न है।
धारचूला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ महेंद्र जायसवाल से दूरसंचार पर वार्ता करने के उपरांत उनका कहना था की दिनभर इनवर्टर का कार्य करने से इनवर्टर बैठ गया है और जनरेटर के लिए और कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कि आपातकालीन व्यवस्था पर मोबाइल से ही काम चला जा रहा है डॉक्टर जायसवाल का कहना था कि कल मैं चिकित्सा नरसिया रात्रि डॉक्टर से परामर्श कर लूंगा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ है या एक बहुत बड़ा सोचनी प्रश्न है सीमा क्षेत्र सीमा का बॉर्डर है इसके दोनों तरफ चाइना और नेपाल और तिब्बत है या एकमात्र 100 बेड का अस्पताल है जिस पर विद्युत की सारी व्यवस्थाएं हैं। उसके उपरांत भी प्रशासनिक लापरवाही कहें या संचार के साधनों का अभाव कहें लेकिन मरीजों की विपदा कोई नहीं देख रहा है। डॉक्टर अमीर आलम जो रात्रि चिकित्सक थे एवं 2 स्टाफ नर्स उनके साथ थी रावती उनका कहना था कि इनवर्टर ओर जनरेटर काम नहीं कर रहे हैं। जिससे कि हमें रात्रि ड्यूटी करने में भी काफी परेशानी हो रही है। रात्री ही में स्टाफ नर्स अस्पताल के अंदर ही सोती हैं । जो कि अंधेरे से डरी और सहमी थी क्या इस तरह डरे सहमे डॉक्टर और नर्स मरीजों का आपातकालीन व्यवस्था में इलाज का इंतजाम कर सकेंगे यह एक सोचनीय प्रश्न है।


