हमारी एकता - अखंडता के लिये राष्ट्रीयता की सांस्कृतिक चेतना का जागरण आवश्यक है -सुशील बहुगुणा
रिपोर्ट... ज्योति डोभाल
टिहरी... रॉड्स अध्यक्ष एवं बीजेपी नेता सुशील बहुगुणा ने अपने विचार ब्यक्त करते हुए कहा कि क्या हम आशा कर सकते हैं कि हमारी लोकतांत्रिक राजनीति का वह भाग , जो धड़ल्ले से क्षेत्रीय - जातीय चरित्र विकसित कर रहा है , कल देश के लिए लड़ेगा ? जिनकी सीमाएं ही राज्य विशेष की हैं , जिनका लक्ष्य मात्र उस राज्य की सत्ता है , वे समग्र देश के लिए कभी खड़े भी हो सकेंगे ? उनके नेतृत्व को आपसी विभेद की सोच को बढ़ावा देने के अतिरिक्त क्या कभी कोई राष्ट्रीय महत्व के विषय उठाते देखा - सुना गया है ? क्या कभी उन्हें पाकिस्तान के विरुद्ध बयान देते सुना गया है ? नहीं , क्योंकि वे मानते हैं कि इससे उनका वोट नाराज हो सकता है । ये समूह जिस सोच को लेकर चल रहे हैं वह राष्ट्रहित के सर्वथा विपरीत ही तो है ।
निहित स्वार्थी और क्षुद्र नेताओं को देख और समझ रहे हैं । परिवारवाद से ग्रस्त राष्ट्रीय , क्षेत्रीय दलों तथा उन जातिवादी नेताओं को देख रहे हैं । तुष्टीकरण से जन्मे स्वार्थी संगठनों और दलों को जान रहे हैं । जातिवादी और सांप्रदायिक विभाजनकारी समूहों की बातें भी हमने सुनी हैं । भय होता है कि हमारे - अधकचरे लोकतंत्र में सत्ता की आपाधापी और के बंदरबांट के बीच कहीं येल्तसिन जैसा कोई स्वार्थी चरित्र सत्ता में न आ जाए ।
इसलिए समग्र राष्ट्र में राष्ट्रीयता की सांस्कृतिक चेतना का जागरण ही हमारे लिए एकमात्र उपाय है । क्षेत्र , जाति , भाषा की मानसिकता को दरकिनार करते हुए आज जो राष्ट्रवादी विचारों का अंकुरण प्रारंभ हो रहा है उसी में ही हमारी एकता - अखंडता का सशक्त चेहरा दिखाई देता है ।


