देहरादून.. कोरोना को लेकर प्रदेश सरकार पूरी तरह लॉक दिखाई दे रही,कई महकमों में कोरोना के चलते ताले लग गए हैं और जनता परेशान है। त्रिवेंद्र सरकार की नीति के चलते, कोरोना प्रदेश के लोगों के लिए अब जानलेवा साबित होता जा रहा है। पिछले दो दिनों में इसका ग्राफ बढ़ता जा रहा है। आप प्रदेश अध्यक्ष एस एस कलेर ने त्रिवेंद्र सिंह रावत पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा ,सूबे के मुख्यमंत्री हर तीसरे दिन क्वारांटिन हो जाते हैं और कुंभकर्णी नींद में सो जाते हैं। राज्य में हालात बद से बदतर हो गए और सूबे के मुखिया आख़िर कब कुंभकर्णी नींद से उठेंगे।
कलेर ने मुख्यमंत्री से पूछा, कहां है वो तैयारी जिसका ढिंढोरा वो पीट रहे थे? कहां है महफूज़ हमारे प्रदेश के लोग,कहां है टेस्टिंग और इलाज की समुचित व्यवस्था ?
एस एस कलेर ने कहा,हवाई क़िले बनाने वाली त्रिवेंद्र सरकार की ज़मीनी हक़ीक़त की पोल खुल चुकी है.
प्रदेश के मुखिया के पास सारा प्रशासनिक अमला है.... स्वास्थ्य विभाग खुद उनके पास है... फिर भी इतनी बेबसी क्यों है... सीएम त्रिवेंद्र जरा बताए कि प्रदेश में लगातार हो रही मौतों का जिम्मेदार कौन है? आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जो कर दिखाया और इस महामारी पर कंट्रोल किया, फिर उत्तराखंड के सीएम क्यों फेल हो रहे हैं?
जो नीति,काम राज्यसरकार को करना चाहिए वो इंसानियत,दिल्ली के मुख्यमंत्री कर रहे। आज आदमी पार्टी का कार्यकर्ता हर गली- हर गांव गांव जाकर, लोगों की ऑक्सीजन लेवल और पल्स की जाँच में मदद कर रहा है और उत्तराखंड की जनता को, सोशल डिस्टेंसिंग और सेनिटाइज के बारे में जानकारी भी दे रहे है। पर प्रदेश के सीएम साहब के हाथ में सब कुछ होने के बाद भी हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
प्रदेशभर में कोरोना से मौतों का आंकड़ा 378 हो चला है। प्रदेश में 6 प्रतिशत संक्रमण की दर से वृद्धि हो चली है। जिसका सबसे बड़ा कारण प्रदेश के मुखिया की गलत नीति और जनता के प्रति लापरवाह होना है।
आज प्रदेश सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इस महामारी के काल में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कितने चिंतित है इस बात का पता क्वरंटाइन सेंटर के हालात बता रहे हैं । जहां मरीजों के लिए खाने से लेकर रहने तक की सुविधा का अभाव है।पिछले दिनों देहरादून के दून अस्पताल में बुजुर्ग कोरोना मरीज को अस्पताल के बिस्तर पर छोड़ दिया गया पर किसी ने उसकी सुध नहीं ली। अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी के कारण बुजुर्ग महिला की जान से खिलवाड़ किया गया। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के हालात बद से बदतर हैं जहां मरीजों की खोज खबर लेने वाला कोई दिखाई नहीं देता। दूसरी ओर प्रदेश में कोरोना मरीजों की टेस्टिंग दरें भी नहीं बढ़ाई जा रही है। जिससे उन्हें अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लगातार कोरोना के बढ़ते मामले और प्रदेश सरकार की निष्क्रियता ये साबित करती है कि सीएम को प्रदेश की जनता से कोई लगाव नहीं है। सीएम भी समझ चुके हैं कि जनता को उनकी कार्यशैली के बारे में अच्छी तरह से पता चल चुका है और जनता 2022 के चुनाव में उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के मूड में है शायद यही वजह है मुख्यमंत्री को अब ना उत्तराखंड से कोई सरोकार है और ना ही उत्तराखंड की जनता से।


