रिपोर्टः ज्योति डोभाल
टिहरीः रॉड्स अध्यक्ष सुशील बहुगुणा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सरकार को आगाह किया जिसमें उन्होने कहा कि अब समय आ गया है कि केन्द्र और राज्य की सरकार इस बात पर गंभीरता से मंथन करें कि ऐसे कौन - कौन से उपाए किए जाएं जिससे अपनी दिनचर्या या रोजी - रोटी चलाने के लिए लोगों को कम से कम सड़क पर आना पड़े । एक अनुमान के अनुसार देश की करीब 25 से 30 प्रतिशत आबादी को अपना कामकाज निपटाने के लिए सिर्फ इसलिए सड़क पर इधर से उधर दौड़ाना पड़ता हैं क्योंकि उसके पास तकनीकी ज्ञान काफी कम है या नहीं है । यही वजह है जहां कई विकसित और विकाशसील देशों में जो काम लोग घरों में बैठे - बैठे ऑनलाइन निपटा देते हैं , उसी काम को करने के लिए आम भारतीय को सरकारी आफिसों , बैंकों , मेडिकल स्टोरों , फल - सब्जी और राशन की दुकानों आदि के चक्कर लगाने पड़ते हैं । इसके चलते आम भारतीय को समय . श्रम और पैसा तीनों बर्बाद करना पड़ता है । वहीं सड़क पर बेतहाशा दौड़ती गाड़ियों के लिए मंहगा ईंधन आयात करना पड़ता है । सड़क पर भीड़ बढ़ती है , जिसके कारण प्रदूषण बढ़ता है ।
प्रदूषण लॉकडाउन के कारण पर्यावरण में आया सकारात्मक बदलाव हमें इस बात का अहसास कराता है कि यदि प्रकृति और उसके संसाधनों का अनुचित दोहन नहीं किया जाए तो हम कई मुसीबतों जैसे बाढ़, सूखे, बढ़ते तापमान आदि से बच सकते हैं तो ग्लेशियरों को पिघलने से भी बचा सकते हैं। कोरोना महामारी ने हमें यह भी समझा दिया है कि यदि हमें पृथ्वी को बचाना है तो उसके संरक्षण के लिए हमें कोई कारगर नीति बनानी ही होगी। पेड़-पौधों, जंगलों और जानवरों को बचाना एवं संरक्षण देना होगा। जीवनदायिनी नदियों को प्राकृतिक तौर पर आगे बढ़ने के लिए संरक्षण दिया जाए, उसमें गिरने वाले नालों और फैक्ट्रियों के गंदे पानी पर रोक लगाई जाए। सिर्फ कानून बनाकर यह काम नहीं हो सकता है, इसके लिए जनता को जागरूक भी करना पड़ेगा।
आज पर्यावरण दिवस पर सुशील बहुगुणा के द्वारा यह सुझाव दिया गया |इस अवसर पर सोशल डिस्टेंस को ध्यान मे रखते हुऐ रॉड्स रानीचौरी. चाइल्ड लाइन महिला मंगल दल भाटूसैण चौपड़ियाली कोटिगाड ने बृक्षारोपण कर व चाइल्ड लाइन से जुड़े पर्वतीय बाल मंच के आशिका पुंडीर ,शुभम कोठारी, संजना सेमवाल ,अभिनेष बहुगुणा ,आयुष द्वारा पेंटिंग बना कर मनाया गया ၊



