रिपोर्ट : वीरेन्द्र नेगी
उत्तरकाशी : उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ जीवों में अपना अहम महत्व रखने वाला ब्लू शिप स्थानीय भाषा में भरल समय से पूर्व ही निचले इलाकों में देखा गया है। अमूमन यह भरल गर्मियों के बाद बरसात में हरी घास और पानी की तलाश में चुंगते चुंगते निचले इलाकों में अगस्त सितम्बर माह में देखने को मिलते हैं। भरल इन दिनों गंगोत्री हाईवे के आसपास सोनगाड़ और डबरानी क्षेत्रों में झुंड में देखे गए हैं। स्थानीय लोगों की माने तो यह भरल ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक बर्फबारी के कारण समय से पूर्व ही भोजन की तलाश में निचले इलाकों में आ गए हैं।
भरल उच्च हिमालयी क्षेत्रों के करीब 3000 मीटर और 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यह हमेशा करीब 15 से 20 की झुंड में रहते हैं और इन्हें बर्फीले इलाकों के राजा स्नो लेपर्ड का पूरक कहा जाता है। भरल स्नो लेपर्ड का पसंदीदा भोजन होता है और स्नो लेपर्ड अगर किसी की वजह से ऊंचाई वाले इलाकों में जिंदा रहता है तो वह भरल का भोजन है। भरल उच्च हिमालयी क्षेत्रों के दुर्लभ जीवों में से एक है।
भरल गत वर्ष अगस्त सितम्बर माह में 2500 मीटर की ऊंचाई के निचले क्षेत्रों में देखने को मिले थे। लेकिन इस वर्ष फरवरी माह में ही भरल सोनगाड़ के आसपास देखे गए हैं। स्थानीय लोगों की माने तो इस वर्ष ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक बर्फबारी के कारण भरल का झुंड भोजन की तलाश में फरवरी माह में ही नीचे उतर आए हैं। बता दें कि कुछ वर्ष पूर्व भारत सरकार वन मंत्रालय ने भरलों की संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चलाया था।


