भगवान पर भरोसा और अपने आप पर विश्वास रखोगे तो मन्जिल जरूर मिलेगी

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भगवान पर भरोसा और अपने आप पर विश्वास पहुंचाता है मंजिल तक

अगर सच्चे मन से भगवान को पुकारो तो वो जरूर मदद करता है
एक बार की बात है एक मेजर और उनके तीन साथी कैलाश यात्रा पर निकले काफी आगे जाने के बाद उनको रात होने लगी उन्होंने वहीं पर विश्राम करने की योजना बनाई परन्तु उन्हे भूख , प्यास लगी थी और दूर दूर तक कहीं कोई होटल भी नजर नही आ रहा था उन्होने सोचा थोड़ा आगे चलकर देखना चाहिये तो थोड़ी दूरी पर उन्हें एक पुराना सा ढाबा दिखाई दिया जिस पर ताला लगा हुआ था मेजर ने इधर उधर नजरें दौड़ाई तो कोई भी नही दिखाई दिया उन्होने आवाजें भी दी कोई है जो हमें सुन रहा है परन्तु कहीं से कोई उत्तर नही मिला अब मेजर और उनके साथियों का धैर्य जवाब देने लगा था भूख और प्यास से उनका बुरा हाल था साथ ही अंधेरा भी हो चला था ၊
मेजर ने भगवान भोलेनाथ को याद किया और कहा तेरे दर पर हैं प्रभु अब तू ही मदद कर   इतने में उनके साथियों ने कहा हमें इस ढाबे का ताला तोड़कर देखना चाहिये शायद कुछ मिल जाये ၊ मेजर ने इसे ठीक नही समझा परन्तु भूख , प्यास के आगे मेजर भी विवश था उन्होने ताला तोड़ने का फैसला कर लिया ၊ मेजर ने पत्थर से ताला तोड़ा तो अन्दर का नजारा देखकर उनके चेहरे खिल गये अन्दर बिस्किट , नमकीन के साथ ही चीनी , पत्ती सबकुछ था ၊  मेजर ने ऊपर वाले का धन्यवाद अदा किया और बिस्किट नमकीन के साथ चाय बना कर रात को वहीं सो गये ၊
शुबह मेजर और उसके साथी जल्दी उठ गये थे उन्होने सुबह जल्दी निकलने का फैसला किया और जाने से पहले मेजर ने एक हजार रुपये यह सोच कर पत्थर के नीचे दबा कर ढाबे पर रखे कि ढाबे वाला इसे चोरी ना समझे और उसके बाद उनकी टीम आगे बढ़ गई ၊
उधर ढाबे का मालिक बीमार और बूढ़ा हो चला था उसका ढाबा काफी समय से बन्द था उसके पास दवाइयों के पैसे की नही थे और ना ही घर में राशन बची थी बूढ़े की हालत बहुत खराब थी उसने भगवान को पुकारा और मदद की गुहार लगाई तभी उसके दिमाग में विचार आया कि ढाबा बन्द करने से पहले उसके ढाबे मे कुछ बिस्किट और नमकीन के पैकेट बचे थे उसने सोचा क्यों ना उन्हे लेकर आऊं कुछ तो भूख मिटेगी और वह अपने ढाबे की ओर धीरे धीरे बढ़ने लगा ၊
ढाबे पर पहुंचकर उसने ताला टूटा देखा तो बूढ़े की चीख निकल गई बूढ़ा रोते हुये भगवान से गुहार लगाने लगा कि चोरों ने उसके ढाबे मे रखा सामान तक नही छोड़ा ၊
तभी बूढ़े की नजर मेज के ऊपर रखे पत्थर पर गई तो उसकी आंखे फैल गई उसे वहां पर मेजर के रखे हुये एक हजार रुपये दिख गये बूढ़ा बहुत खुश हुआ और मन ही मन भगवान का धन्यवाद अदा करने लगा कि उसने उसकी सारी परेशानी एक झटके में खत्म कर दी ၊
कुछ दिन बाद मेजर अपनी टीम के साथ वापस आने लगे तो उन्हे वही ढाबा खुला हुआ मिला मेजर को बड़ी खुशी हुई और वो उस ढाबे की ओर बढ़ चला उसने देखा कि एक कमजोर बूढ़ा उस ढाबे पर बैठा था और बड़ा खुश भी था ၊
मेजर ने उसके पास पहुंचकर सारी बात बतानी चाही कि ताला उन्होने ही तोड़ा था पर चोरी के इरादे से नही बल्कि अपनी भूख शान्त करने के लिए तभी बूढ़ा व्यक्ति खुश होते हुये बोला साहब मेरा ढाबा बहुत दिनों से बन्द था और मैं बीमार था घर पर राशन तक नही बची थी परन्तु ऊपर वाले ने किसी फरिश्ते को मेरी मदद करने को भेज दिया वह फरिश्ता यहां पर एक हजार रूपये रख कर गया जिससे मेरी दवाइयां , राशन और ढाबे का सामान तक आ गया ၊
अब मेजर को सब कुछ समझ में आ गया था कि ऊपर वाले ने हमारे हाथों को इस बूढ़े व्यक्ति की मदद के लिए चुना था ၊ मेजर की आंखो में पानी था उसने मन ही मन भगवान का धन्यवाद अदा किया उसे समझ में आ गया था कि भगवान ने दोनों को माध्यम बना कर एक दूसरे की मदद करवाई थी ၊ अब मेजर के पास बूढ़े की बातों के लिए कोई शब्द नही थे और ना ही मेजर ने बूढ़े से रात वाली घटना का जिक्र किया ၊ उन्होने वहां पर रवाना खाया और घर की ओर वापस चल दिये  ၊
सीख - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि भगवान पर भरोसा रखना चाहिये चाहे कितनी भी मुसीबत क्यों न आ जाये उस पर विश्वास रखना चाहिये भगवान साक्षात दर्शन नही देंगे पर किसी न किसी को माध्यम बना कर आपकी मदद जरूर करेंगे ၊
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Team uk live

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