डी पी उनियाल गजा): जिलाधिकारी टिहरी व पर्यटन विभाग की पहल भविष्य में गजा गौंत्याचली घंटाकर्ण (क्वीली डांडा) एवं डांडाचली लोहिताल गजा पैदल ट्रैकिंग रुट पर ट्रैकिंग करने वाले पर्यटकों को भरपूर प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा देखने के लिए रोमांचित करेंगे, गजा घंटाकर्ण पैदल मार्ग हो या डांडाचली लोहिताल गजा पैदल मार्ग हो, दोनों पर बांज, बुरांश, भमोरा, काफल, देवदार के ठंडी छांव देने वाले सघन पेड़ हैं। दोनों ट्रैकिंग पैदल रास्तों पर से पर्यटक हिमालय के दर्शन करने के साथ ही आस्था व श्रद्धा के मंदिरों के दर्शन भी कर सकेंगे, गजा से घंटाकर्ण पैदल मार्ग पर ट्रैक करने के लिए गजा तमियार सडक मार्ग पर 4 किलोमीटर चलने के बाद 2 किलोमीटर गौंत्याचली तक जाने के बाद लगभग साढ़े तीन कीलोमीटर पैदल चलकर घंटाकर्ण मंदिर पहुँच सकते हैं, रास्ते में काफल, बुरांश, भमोरा, बांज के बृक्षों की शीतल व शुद्ध हवा तो मिलेगी ही साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य भी मिलता रहेगा, पर्यटन के साथ ही आस्था व श्रद्धा के साथ पौराणिक घंटाकर्ण भगवान के दर्शन भी होंगे, मंदिर मे पहुंचने से पहले ही भीम चुल्हा भी देखने को मिलेगा, इसी तरह डांडाचली लोहिताल गजा आते समय भी देवदार, के साथ ही मिश्रित जंगल की चढाई चढते हुए कुछ काटेज (ठहरने के लिए) के बाद समतल लोहिताल डांडा है यहाँ पर भी माणदा धार अकरिया निवासियों का घंडियाल मंदिर बना है, वर्षों पहले गजा डाकघर से जब डाक रनर डाक का थैला लेकर रानीचौरी जाता था तो इसी पैदल रास्ते से आना जाना होता था, इन दोनों ट्रैकिंग रुट पर गजा बाजार है, जो कि सस्ता भोजन, सामान, व ताजी सब्जियों के लिए जाना जाता है। तो आइए बैग तैयार कीजिये व पैदल ट्रैकिंग रुट पर आकर प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद लीजिए।


