डी पी उनियाल
गजा / चम्बा: विकास खंड चम्बा ग्राम पंचायत गौंसारी निवासी पूर्व सैनिक मान सिंह चौहान ने विगत एक दशक पहले सेना से सेवा निवृत होने के बाद कहीं अन्यत्र नौकरी करने के बजाय कीवी फलोत्पादन को स्वरोजगार का साधन अपना कर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने का जरिया बनाया, पूर्व सैनिक मान सिंह चौहान बताते हैं कि कीवी फलोत्पादन के बारे में जब उनको जानकारी मिली तो उन्होंने कीवी के 4 पौधे मादा व 1 पौधा नर लगाया, उनके लिए टी (T) आकार के लोहे के ऐंगल लगाकर उनके ऊपर तार का जाला बनाया, तीन चार साल बाद ही पौधों ने फल देने आरम्भ कर दिए, वह बताते हैं कि कीवी फल को बंदर आदि जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं साथ ही ऐंगलों के ऊपर बेल फैलने से उसके नीचे नगदी सब्जी उगाई जा सकती है, राई, मटर, मिर्च, अन्य सब्जियां खूब पैदा की जा रही हैं । मान सिंह चौहान ने बताया कि अब तक लाखों रुपए की कमाई कर आय का साधन बन गया है। बाजार में इसकी खूब मांग है यह डेंगू बिमारी की अचूक दवा है। गजा क्षेत्र के निकट अन्य अनेक लोग इसका उत्पादन कर रहे हैं, ग्राम दुवाकोटी की श्रीमती सीता चौहान भी गृहणी से "कीवी क्वीन" बन चुकी है, सीता चौहान भी लाखों रुपए कमा रही हैं, नगर पंचायत गजा अध्यक्ष कुंवर सिंह चौहान ने भी तीन साल पहले 5 पौधे लगाए हैं वह भी अब फल देने शुरू कर रहे हैं। ग्राम बेरनी व जगेठी मे भी कीवी फलोत्पादन किया जा रहा है। उद्यान रक्षा सचल दल गजा की प्रभारी श्रीमती सुषमा ने बताया कि जो भी काश्तकार कीवी फल के पौधे लगाना चाहते हैं वह मांग कर सकते हैं। बताया कि मादा कीवी पौधों के साथ नर पौधा लगाना अनिवार्य है।


