छोटे कर्मचारियों को को निलंबित कर सरकार ने अपनी लेट लतीफी पर पर्दा डाला: शान्ति प्रसाद भट्ट,प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस

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Team uklive


 टिहरी :  कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मे जंगलों की आग पर हो रही सुनवाई और विपक्ष के चौतरफा दबाव से सरकार हरकत मे आई है. 


विगत एक माह से  उतराखंड के जंगलों में आग लगी है, और आग की अनुमानित 900 से अधिक घटनाएं हो चुकी है,जिनमे 800हेक्टेयर से अधिक वन/मिश्रित वन जलकर राख हो गए है.
आलम यह है कि आग रिहायसो तक पहुंच रही है, प्रतिपक्ष लगातार सरकार से पूछ रहा था कि मुख्य जिम्मेदार  लोग कब लीडिंग रोल मे आयेंगे, लेकिन डबल इंजन सरकार को अन्य राज्यों मे चुनाव की चिंता थी और मुख्यमंत्री , मंत्री अन्य राज्यो के प्रचार मे व्यस्त थे.
 इधर आग ने कोहराम मचा रखा है.
उन्होंने कहा कि  मुख्यमंत्री ने आज ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाला तो जनता मे आवाज उठी "बहुत देर कर दी हुजूर आते आते.
सरकार भूल गई कि उतराखंड पर 60 करोड़ लोगों का जीवन निर्भर करता है।
 
भट्ट ने  सरकार से सवाल करते हुए कहा कि 

रेंजो मे फायर लायन काटने का काम पहले क्यों नहीं किया गया? इस कार्य के लिए समय रहते पर्याप्त धनआवंटन क्यों नही हुआ?

फायर वाचर क्यों नियुक्त नही किए गए ?
 
 वन एवम वनवासी(ग्रामवासी) वनो की सुरक्षा से विमुख क्यों हो रहे है ?

 प्रदेश भर मे वन पंचायतों को क्यों नही एक्टिव किया गया? क्या वन पंचायतों का गठन पूर्ण हुआ भी है या नहीं?

 कुल कितने "फायर गार्ड" कार्य कर रहे है? कहीं वे अन्य कार्यों पर तो नही लगाये गए है?

वनो मे जल कुंडो और ट्रेरंचेज पर समय रहते कार्य क्यों नही किए जाते?

वर्तमान सरकार ने "फायर सीजन"  को गंभीरता से क्यो नही लिया ?

जंगलो मे आग की रोकथाम के लिए क्यो नही फयार सीजन से पूर्व व्यापक प्रचार प्रसार किया ?

हर घर नल योजना के तहत ग्रामों के परंपरागत पाणी के स्रोतों को क्यो खत्म किया गया , उन्हे पुनर्जीवित करने के लिए पेयजल से जुड़े विभागो को युद्ध स्तर पर टास्क क्यो नही दिया?
 जिमेदार आला अधिकारियों की जिम्मेदारी कब तय होगी ?

उन्होंने कहा कि आखिर मंत्री ,विधायक, सांसद, और निर्वाचित प्रतिनिधि क्या कर रहे हैं. 

 आंकड़े बताते हैं: उतराखंड मे 72%भाग वनो से आच्छादित है, 18%भाग हिमाच्छादित है, 12 हजार से अधिक ग्लेशियर है, 11 बड़ी नदिया है, और अनेक सहायक नदियां है जो समस्त उतर भारत की जीवन रेखा है और 60करोड़ से अधिक लोगों को जीवन देती है। 

मात्र 6%कृषि योग्य भुमि है।
 यही वो जंगल है, जो हमें वायु सुरक्षा, जल सुरक्षा, अन्न सुरक्षा, चारा पत्ती,खेती पशुपालन गीत संगीत देते है ।
  कहा कि पूर्व  मुख्यमंत्री  हरीश रावत  ने अपने कार्यकाल मे केन्द्रीय सरकार को चीड़ के पातन का महत्वपूर्ण सुझाव दिया था और इसके लिए क्लस्टर बना कर अनुमति भी मांगी थीं ताकी चीड़ के पेड़ को हटा कर बांझ बुरास सहित चौड़ी पत्ती के पेड़ों को लगाया जाय, पर केंद्र ने अनुमती नहीं दी,अब राज्य और केंद्र मे भाजपा की सरकार है तो इस पर क्यो नही दीर्घकालिक योजना बनाती है।

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