Team uklive
उत्तरकाशी : उत्तराखंड में हाई कोर्ट के आदेशानुसार अतिक्रमण हटाया जा रहा है और इसके चपेट में पहाडी़ क्षेत्र भी हैं जहां अतिक्रमण हटाया जा रहा है।
पहाड़ी स्लोगन हैं पहाड़ का पानी पहाड़ कि जवानी. इस स्लोगन से पहाड़ो में के युवा व् बुजुर्ग का उल्टा असर देखने को मिल रहा हैं. जंहा एक तरफ बेरोजगारी चरम पर देखने को मिल रही हैं. वहीं पहाड़ो में छोटे रोजगार में भी अब खतरा देखने को मिल रहा हैं. NH पर खोले गए छोटे दुकाने भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.पहाड़ के व्यक्ति बेरोजगारी पर इसका आने वाले समय में बड़ा असर देखने को मिल सकता हैं. जंहा अवैध रूप से बड़े बड़े भवन बने हैं उन पर अतिक्रमण आवश्यक हैं.
मामला उत्तरकाशी जिले ब्रह्मखाल का है जहां व्यापारी और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया है और व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ लोगों के आसियाने गलत तरिके से तोड़े जा रहे जिससे व्यापारीयों का शोषण हो रहा है।
स्थानीय व्यापारी राकेश परमार और सुरेश चंद्र रमोला ने बताया कि NH और जिला प्रशासन अतिक्रमण भेदभाव करके तोड़ रहे हैं.साथ ही रसुखदारों को बचाने की कोशिश कि जा रही है, ब्रह्मखाल बाजार आलवेदर सड़क के अंतर्गत है और यहां पहले चौडी़करण हो चुका है तो इसी मामले पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया की जब सड़क माप के तहत कट रखी है तो अब बिना नक्से व् मानक के कैसे हटाया जा रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारीयों ने सरकार से न्याय की मांग की है और गलत तरिके तोडे़ गये भवनों का मुआवजा देने की बात उठाई है।


