बेरोजगार को रोजगार ना देकर जीएमवीएन की फैक्ट्री बनी एक मखोल .

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रिपोर्ट : वीरेंद्र सिंह नेगी 


उत्तरकाशी : भटवाड़ी ब्लॉक के गणेशपुर गांव में दशकों से बंद पड़ी जीएमवीएन की फैक्ट्री को दोबारा संचालित नहीं करने पर ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से फैक्ट्री को खोलने या ग्रामीणों को इसे संचालित करने का हक देने की मांग की है। उन्होंने जनवरी तक मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।


गंगोत्री हाईवे के निकट स्थित यह फैक्ट्री पर्यटन, कृषि आधारित रोजगार का प्रमुख केंद्र बन सकती है। प्रदीप राणा  ने कहा कि फैक्ट्री दोबारा खोलने को लेकर शासन व् प्रशासन से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन पलायन रोकने व रोजगार देने के दावे करने वाला सरकारी तंत्र कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 



अविभाजित उत्तर प्रदेश के वक्त गणेशपुर गांव में लकड़ी के फर्नीचर आदि निर्माण के लिए फैक्ट्री खोली गई थी, जहां गणेशपुर, नेताला, नाल्ड, हीना, मनेरी, गंगोरी, सिरोर, उत्तरों आदि गांवों के ग्रामीण कार्य करते थे। पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह जीएमवीएन ने यहां मिनरल वाटर प्लांट स्थापित किया, लेकिन छः माह  के भीतर ही यह प्लांट ठप पड़ गया।  यहां फर्नीचर उद्योग और मिनरल वाटर प्लांट बंद पड़ा है। 


गणेशपुर के प्रदीप राणा सामाजिक कार्यकर्ता, सुनील नेगी ग्राम्य प्रधान, कानि बधानि, कपिल मखलोगा भागीरथी मंडल अध्यक्ष, महिपाल आदि इसका विरोद्ध करते दिखे.

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