अंतरराष्ट्रीय योग सप्ताह के मौके पर पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के तत्वावधान में एक दिवसीय योग शिविर का आयोजन

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 Team uklive


ऋषिकेश।अंतरराष्ट्रीय योग सप्ताह के मौके पर पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के तत्वावधान में नवचेतना एकेडमी नीम करौली नगर में महिलाओं की शारीरिक मानसिक व सामाजिक वैलनेस के लिए एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कहा गया कि मौन आत्मा का आहार है।

सोमवार को आयोजित शिविर का शुभारंभ योगी करण पाल महाराज, पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार से आई प्रोफेसर डॉक्टर वैशाली, प्रोफेसर आरती, साध्वी देव स्तुति, पतंजलि महिला समिति के जिला अध्यक्ष सुनीता खंडूरी, महामंत्री पुष्पा मित्तल, प्रधानाचार्य नीलम नवानी आदि ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार की योग छात्राओं व नवचेतना एकेडमी के छात्रों ने सुंदर योग का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर कहा गया कि महिलाओं की सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में अवसाद भी मुख्य है।पुरुषों की तुलना में महिलाएं अवसाद से ज्यादा ग्रस्त रहती हैं। महिलाओं में आमतौर पर पाए जाने वाले अवसाद के विभिन्न लक्षण हैं बार-बार रोना, अकेलापन महसूस करना, वजन कम होना और आसानी से चिढ़ना/गुस्सा होना। उनके पास फिर कुछ भी करने या किसी गतिविधि का आनंद लेने के लिए किसी प्रकार की ऊर्जा शेष नहीं रह पाती है। कुछ लोगों को तो उदास होने पर खुद को चोट पहुँचाने की भी इच्छा होती है। कहा गया कि बहुत सी महिलाएं अपने जीवन में चिंता का अनुभव अलग तरह से करती हैं। चिंता का कारण आमतौर पर तनाव होता है। लेकिन जब यह आपके नियमित जीवन और काम को प्रभावित करने लगे तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। मासिक धर्म के समय हार्मोनल परिवर्तन,  दुर्व्यवहार जैसी दर्दनाक घटनाएं महिलाओं में चिंता विकार का कारण बन सकती हैं। 


महिलाओं में चिंता के कुछ अलग-अलग रूप देखे जाते हैं जैसे कि सामान्यीकृत चिंता विकार, जो तब होता है जब कोई व्यक्ति परिवार, स्वास्थ्य या काम जैसी दैनिक जीवन की समस्याओं के बारे में जोर देना शुरू कर देता है। एक और है पैनिक डिसऑर्डर, जो तब होता है जब महिलाओं को लगता है कि वे घबरा रही हैं या किसी चीज पर नियंत्रण खो रही हैं। इसके अलावा  गर्भावस्था के बाद या उसके दौरान महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। 

बताया गया कि जिन महिलाओं ने अपने जीवन में किसी भी प्रकार की दर्दनाक, डरावनी या चौंकाने वाली घटनाओं का अनुभव किया है, वे पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव से ग्रस्त होती है। महिलाओं के भीतर पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव  किसी करीबी व्यक्ति की अचानक मृत्यु, या कोई दुर्घटना हो सकती हैं।

पीटीएसडी से पीड़ित महिलाओं में अक्सर देखे जाने वाले लक्षण अवांछित अतीत की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति, उन यादों के फ्लैशबैक, बुरे सपने, मतिभ्रम आदि हैं। इस विकार की तीव्रता घटनाओं के प्रकार के अनुसार बदलती रहती है। शिविर में बताया गया कि बाइपोलर डिसऑर्डर एक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसका सामना महिलाओं को करना पड़ता है। हार्मोनल असंतुलन, भावनात्मक शोषण, और कई अन्य चीजें हैं जिसके कारण महिलाओं में बाइपोलर डिसऑर्डर होता हैं। महिलाओं में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों और संकेतों में उन्माद का महसूस होना शामिल हैं जैसे हाई महसूस करना, उच्च ऊर्जा स्तर, सोने में असमर्थता, आसानी से विचलित होना, कुछ महिलाओं को लो या उदास महसूस होना, वजन बढ़ना, हर चीज में रुचि खोना, एकाग्रता की कमी, और बहुत कुछ जैसे लक्षणों के साथ अवसादग्रस्तता का भी अनुभव हो सकता है। कन्क्लूज़न मानसिक स्वास्थ्य विकार जैविक के साथ-साथ सामाजिक कारकों का परिणाम हैं।  मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। यह इसको भी प्रभावित करता है कि आप कार्य को कैसे करते हैं, सोचते हैं या महसूस करते हैं। कहा गया इन सभी समस्याओं का निदान योग के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है। आवश्यकता नियमित योग करने की है।

 इस अवसर पर संरक्षिका हरविंदर कौर कालरा, संगठन मंत्री रजनी बिजलवाण, रजनी धीमान, उषा रौतेला, सरिता पाल, कमलेश, अनूप रावत, नीलम काला चमोली, माया घले रचना चड्ढा, मीनू, अर्चना पांडे आदि मौजूद थे।

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