Team uklive
रिखणीखाल-रिखणीखाल प्रखंड के अन्तिम छोर में विषम भौगोलिक स्थिति में स्थित " कठुलिया महादेव मंदिर चुरानी" अपनी दुखभरी व्यथा बताने को मजबूर हो रहा है।यह पौराणिक कठुलिया महादेव मंदिर लगभग 200 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर है।यह नयार नदी के तट पर अपनी सुन्दर,मनमोहक छटा बिखेरे हुआ है।पास ही विशाल व भव्य नयार नदी बह रही है जो कलकल करती अपनी मधुर आवाज में दर्शको व भक्तजनों का मन मोह लेती है।इसके आसपास अनेकों गाँव हैं जैसे चुरानी,सिद्धखाल,मंज्याडीसैण आदि प्रमुख है।ये महादेव मंदिर अनेकों गांवों का आस्था व विश्वास का केंद्र है।क्षेत्रीय ग्रामीण इस मंदिर में समय-समय पर ज्ञान यज्ञ ,पूजा पाठ,भंडारा आदि करते हैं।
अभी भी 15/06/2022 से 21/06/2022 तक कठुलिया महादेव मंदिर में एक भव्य व विशाल श्रीमद भागवत ज्ञान कथा यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है जिसकी तैयारियाँ पूरी हो गई है।इस मंदिर के पास ही नयार नदी बहती है जिसके लिए भक्तगण व ग्रामीण एक अस्थायी पत्थरों से निर्मित पुल ( टपका) तैयार कर रहे हैं ताकि सिद्धखाल घिरोली मोटर मार्ग से आने जाने वालों को असुविधा का सामना न करना पडें।यह नदी वर्षा होने पर अपना विकराल रूप ले लेती है।इस नयार नदी पर पर एक झूला पुल स्थित है लेकिन वह मंदिर से एक किलोमीटर दूर पड्ता है।मंदिर में आने जाने के लिए सुलभ नहीं है।यह मंदिर सड़क मार्ग से भी अछूता है जबकि रिखणीखाल प्रखंड का प्रसिद्ध व पौराणिक मंदिर है।यहाँ प्रतिवर्ष मेला ( कौथिग) भी लगता है।ये तीन प्रखंडों का केंद्र बिंदु भी है।लेकिन इतनी अनदेखी व उदासीनता क्यों है?समझ से परे है।जबकि स्थानीय जनता सड़क की मांग समय-समय पर बराबर करती है।
अब उन्होंने ठानी है कि अपनी आवाज सोशल मीडिया के माध्यम से क्यों न बुलन्द की जाये।


