रोजमेरी की खेती हेतू स्वयं सहायता समूहों को किया गया पौध वितरण

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रिपोर्ट.. ज्योति डोभाल 
  टिहरी.. ग्रामीणों को रोजमेरी खेती हेतु राड्स के अध्यक्ष सुशील बहुगुणा के द्वारा कालिंका स्वयं सहायता समूह की  20 महिलाओं को पौध वितरित के साथ जड़ी बूटी शोध संस्थान के मास्टर ट्रेनर हरीश डोभाल के द्वारा एक नाली खेत पर रोजमेरी के पौध का रोपण कर डेमो किया गया. 
  सुशील बहुगुणा ने जानकारी देते हुऐ कहा की रोज़मेरी ऐसी  जड़ीबूटी है जिसका रोम-रोम औषधियों से भरपूर है। इसे आम भाषा में गुलमेंहदी कहा जाता है। ये सिर्फ अद्भुत स्वाद और सुगंध से भरपूर नही होती है बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं।
गुणकारी होने के चलते इसकी बाज़ार में काफी डिमांड है जिसके चलते हमारे द्वारा अपने स्वयं सहायता समूह के किसानों से  ने रोज़मेरी की खेती को अपनी आय का विकल्प बढ़ाने का विकल्प दिया गया है |


रोज़मेरी का पौधा 2-3 फीट ऊँचा बहुवर्षीय शाकीय पौधा है।इसकी पत्तियॉं सुई के आकार की 3-4 से.मी.तक लम्बी होती है।पत्तियों में सुगन्धित तेल पाया जाता है जिसमें मुख्य रसायन साइनिआल होता है।इत्र उद्योग में इसका खूब प्रयोग होता है।इसके तेल का अच्छा निर्यात संभव है। जबकि सूखी पत्तियॉ का प्रयोग खाद्य पदार्थो या फिर पिज्जा वगैरह में खूब होता है।
रोजमेरी की खेती करने वाला किसान साल मे एक नाली पर कम से कम दो बार की फ़सल का उत्पादन कर पचास हजार से साठ हजार तक आसानी से कमा लेता है |इस खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नही कर पाते हैं |
इस अवसर पर कालिंका स्वयं सहायता समहू से जुड़े मदन लाल  ग्राम जगधार, साबली की सुमित्रासुनीता गोदामबरी रजनी मंजू सुलोचना सुनीता, मंज्यूड़ से  राजकुमारी, गुनियाट से विमला कटाल्डी से हेमलता, थान से लक्ष्मी आरती को 500पौध वितरित कि गयी |
इसअवसर पर राड्स संस्था के धर्मेंद्र पँवार  कुम्भी बाला भट्ट लक्ष्मी उपस्थित थे. 



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