यशपाल सजवाण
बड़कोट: हथिनी की क्रूरता पूर्वक हत्या के बीच मानवता की मिसाल : जहाँ एक और पूरे देश में हाल ही में हुई केरल में हथिनी की क्रूरता पूर्वक हत्या से पूरा मानव वंश कलंकित है वहीं एक बेजुबान गौ वंश को बचाने में बड़कोट क्षेत्र के वेटनरी डॉक्टर्स की टीम ने मानवता की मिसाल कायम की है । घटना 5 जून के शाम की है जहां बड़कोट तहसील के अंतर्गत खरादी के समीप किशाला गाँव के निवासी अवतार रावत की गाय का एक बछड़ा पास में बनी नहर के ऊपर बने रास्ते से अनियंत्रित होकर फिसल गयी और लोहे की 2 फिट लंबी सरिया जो नहर के ही ऊपर पिलर के रूप में मजबूती से खड़े हैं वो गौ वंश के बछड़े के पेट में घुस गया और छोटी गौ जिसके पेट में सरिया घुस गया पूरे वजन के साथ बाहर की तरफ लटक गई, घटना पे पहुंचे कुछ ग्रामीण लोगों ने किसी तरह गाय माता को ऊपर खींचा पर दर्द से कराहते हुए वहीं अचेत हो गयी , कुछ देर बाद कुलदीप रावत जो नोएडा से हाल ही में अपने आवास खरादी आये , कुछ और लोगों के साथ घटना स्थल पहुंचे , गाय की हालत बेहद नाजुक देखकर उन्हीने अपने एक सामाजिक ग्रुप 'बड़कोट के सभ्य लोग ' में किसी वेटेनरी डॉक्टर की जानकारी मांगी , जिसपे ग्रुप के ही एक अन्य सदस्य भगवती रतूडी ने क्षण भर में उनको क्षेत्र के 2-3 वेटरनरी डॉक्टर्स के नंबर्स उपलब्ध कराए , कुलदीप ने एक डॉक्टर को कॉल किया पर उन्होंने किसी कारण बस अपनी अनुपलब्धता एवं असहजता प्रकट की, अगली कॉल डॉ अनमोल नौटियाल (वेटनरी ऑफिसर हनुमानचट्टी) को किया गया जो उसी समय 10 मिनट पहले एक और इमरजेंसी से वापस आये थे , रात्रि के 9:30 बज चुके थे पर डॉ अनमोल नौटियाल ने बिना कुछ रुके आधे घंटे में पहुंचने का विश्वास दिया और डॉ मायामित्ता सैनी (वेटनरी ऑफिसर राजगढ़ी) और अपनी पूरी टीम के अन्य 2 साथियों सहित रात्रि के 10 बजे खरादी पहुंचे जहाँ से पूरी टीम कुलदीप के साथ 2 km दूर घटना स्थल पहुंचे , चूंकि रात्रि बहुत अधिक हो गयी थी और बेजुबान ने शायद रात्रि के डर के कारण थोड़ा कोशिश कर के आगे किसी झाड़ियों के पास पनाह ले ली थी, गांव के 2-3 और लोगों के साथ वेटनरी ऑफिसर्स और उनकी पूरी टीम जंगल में गाय को ढूंढने की कोशिश करने लगे , रात्रि 11:45 मिनट तक पूरा सर्च आपरेशन जारी रखा पर गाय नही मिली , चूंकि पूरी टीम ने रात्रि का भोजन भी नहीं किया था तो गांव वालों ने पूरी टीम को रात्रि विश्राम और भोजन के लिए जाने की विनती की, अगली सुबह 5:30 पे जैसे ही गाय का पता चला , dr अनमोल को फ़ोन के माद्यम से अवगत कराया गया , चूंकि खुद डॉ अनमोल और डॉ सैनी को सुबह मॉर्निंग में एक और इमरजेंसी केस में दूसरे गांव भी जाना था , उनकी टीम के एक और सदस्य शैलेन्द्र राणा (leo सुकन) सुबह घटना स्थल पहुंचे और खुद उन्हीने आश्वाशन दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वो खुद भी दूसरे गांव के इमरजेंसी केस को सॉल्व करके पहुंच जाएंगे । leo शैलेन्द्र राणा एंड टीम ने गाय के मरहम पे औषधि लगा के और फिर स्टेच्टिंग करके गौ वंश के नन्हे प्राणी को पुनर्जीवन दिया । एक ओर जहाँ कुछ लोग निहत्ते बेजुबान जानवरो पे इतनी क्रूरता करते हैं और कुछ लोग अपने काम का दिखावा अपने किये गए काम से बहुत अधिक करते हैं वहीं वेटनरी आफिसर्स अनुपम नौटियाल , मायामित्ता सैनी और टीम बिना किसी दिखावे के दिन रात अपना काम निश्वार्थ भाव से कर रहे हैं , जो अपनी रात्रि का भोजन भी छोड़कर 14-15 km दूर पहाड़ी और खतरनाक रास्तों की परवाह किये बगैर रात्रि के 10 बजे घटना स्थल पहुँचे ၊


