टिहरी : जहां भारत में कोरोनोवायरस की दहशत से लोग डरे सहमे हैं और दिल्ली सरकार ने कोरोनोवायरस को महामारी घोषित कर दिया है वहीं इन सबसे बेखबर उत्तराखण्ड सरकार तीन दिन का झील महोत्सव टिहरी के कोटी में करने जा रही है वो भी तब जब पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित है और भारत सरकार लोगों को जागरूक करने में लगी है ၊
परन्तु भारत सरकार , उत्तराखण्ड सरकार को जागरूक करने में नाकाम साबित हुई है तभी तो उत्तराखण्ड सरकार जानबूझकर लोगों को कोरोनो वायरस की चपेट में धकेलना चाहती है ၊
उत्तराखण्ड सरकार हर साल करोड़ों रुपये झील महोत्सव के नाम पर खर्च कर देती है परन्तु आज तक सरकार यह नही बता पाई कि इससे आखिर जनता को क्या फायदा होगा या हो रहा है ၊
फायदा तो केवल नेताओं और अधिकारियों को होता है जो झील महोत्सव के नाम पर करोड़ों डकार जाते हैं ၊ उस पैसे से तो किसानों का कर्जा माफ किया जा सकता था जो कर्ज में डूबने के कारण आत्महत्या करने को विवश हैं ၊
सामाजिक कार्यकर्ता अब इस महोत्सव का विरोध करने लगे हैं जहां सामाजिक कार्यकर्ता सुशील बहुगुणा ने इस महोत्सव को रोकने की अपील सरकार से की है तो वहीं शान्ति भट्ट , राकेश राणा , आशा रावत सहित तमाम सामाजिक कार्यकर्ता व व्यापारिक संगठन इस महोत्सव का पुरजोर विरोध करने लगे हैं ၊
वहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह महोत्सव विरोध के बाद भी होता है और बाहर से आये लोगों से किसी भी स्थानीय लोगों में वायरस पहुंचता है तो इसकी सीधे-सीधे जिम्मेदारी उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार की होगी ၊


