रिपोर्ट... ज्योति डोभाल
टिहरी : रॉड्स अध्यक्ष एवं बीजेपी नेता सुशील बहुगुणा ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए समाज की जिम्मेदारी तय करने की बात कही उन्होंने कहा कोरोना महामारी से लड़ाई सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों या सरकार की नहीं है , इसमें समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इस वायरस के प्रसार को रोकने वाली जीवनचर्या को अपनाए , स्वास्थ्य गाइडलाइन का पालन करे
महामारी को तुरंत रोकना किसी के हाथ में नहीं होता । अन्यथा सर्वाधिक संसाधन वाले देश अमेरिका में मौत का आंकड़ा सबसे अधिक नहीं होता । इसलिए यह सवाल उठाना ठीक नहीं है कि पहले से तैयारी नहीं थी या रोकने के लिए किसी ने कुछ नहीं किया । टेस्ट , ट्रैक और ट्रीट की नीति पर चलना ही इस आपदा से निकलने का मंत्र है । आज उत्तर प्रदेश में करीब सवा चार करोड़ , महाराष्ट्र , कर्नाटक में करीब तीन करोड़ और दिल्ली में करीब दो करोड़ टेस्ट हो चुके हैं । उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में एक दिन में लगभग तीन लाख तक टेस्ट हुए । विना सरकारी प्रयास और नेतृत्व की सोच के यह संभव नहीं था ।
सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाना आपका हक है । पर यह भी सोचिए कि सरकार क्या कर लेगी , मंत्री क्या कर लेंगे , मशीनरी क्या कर लेगी , जब समाज की संवेदनाएं ही मर गई हैं ? इस कोविड काल में समाज नंगा हो गया है । कोई कोशिश नहीं होती कि सुरक्षित रहते हुए दुखी , लाचार , बेसहारा के साथ खड़े हुआ जाए । आखिर डॉक्टर नर्सिंग स्टॉफ और पुलिस वाले तो अपने काम को अंजाम दे ही रहे हैं । मत भूलिए , सरकार भी इसी समाज का हिस्सा है ।
आज दिख रही हैँ समाज के भीतर ध्वस्त हो चुकी संवेदनाओं की विचलित करने वाली तस्वीर । कोई कोविड होने पर अपने किरायेदार को घर से बाहर निकाल रहा है । कोई दवाएं और सिलिंडर ब्लैक कर रहा है । कोई बेटा अपने बाप के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो रहा । कितने ही बड़े लोग अपने परिजनों के बिना अंतिम गति को प्राप्त कर रहे हैं । क्या समाज की आत्मा मर गई है ? हम अपने इर्द - गिर्द ऐसे ही संवेदनहीन लोगों से घिरे हैं । जब समाज ऐसा अमानवीय व्यवहार कर रहा हो , तो उसे नियंत्रित करने वाला तंत्र कैसे मानवीय हो सकता है ? कैसे तय होगी तंत्र की जवाबदेही ? उस महान संस्कृति को याद रखिए , जिसके हम ध्वजवाहक हैं । मत्यु के भय से निकलना होगा । वह तो आनी ही है । पर तब तक हम यह समझें कि इस दुनिया में हम क्यूँ आए थे ? यह महामारी किसी एक की नहीं । विषाणु रक्तबीज की तरह खुद को फैला रहा है । उससे लगने वाले तंत्र को भी उतना ही विशाल बनाना होगा । वह बनेगा हमारे अापके साथ खड़े होने से । एक दूसरे की मदद करने से । अभी हमें कोरोना महामारी से जंग लड़ना है व एक जुट होना है|


